मुनाल द्वारा हमारी विरासत लोक संस्कृति कार्यशाला
21 मई को हमारी विरासत कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में होगी प्रस्तुति

लखनऊ : लुप्त हो रही लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए लोक संस्कृति की धरोहर मुनाल द्वारा 5 मई को विधिवत उद्घाटन के साथ मुनाल के संस्थापक दशरथ सिंह बिष्ट व वीरा बिष्ट जी की स्मृति में आयोजित लोक नृत्य तथा लोकगीत कार्यशाला दिनांक 5 मई से 20 मई तक मुनाल बुध बसंती सभागार वजीर हसन रोड तथा पेपर मिल पर आयोजित की जा रही है.उसका मंचन 21 मई को हमारी विरासत कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में किया जाएगा.

कार्यशाला के तहत प्रशिक्षित प्रतिभागियों को गढ़वाली, कुमाऊनी, अवध, ब्रज, बुंदेली, भोजपुरी लोक गीतों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है लोक गायन की कार्यशाला यशभारती सम्मानित वरिष्ठ लोक गायिका सुश्री ऋचा जोशी के संयोजन में किया गया कार्यशाला में सभी आयु वर्ग के प्रतिभागी भाग ले रहे है जिसमें 8 वर्ष से 65 वर्ष तक के प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है लोक विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मानित मुनालश्री विक्रम बिष्ट द्वारा लोक नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा अतिथि समाजसेवी सुश्री माया आनंद ने अपने विचार रखते हुए कहा इस तरह की कार्यशाला होती रहनी चाहिए.

जिससे हमारी संस्कृति हमारी पहचान बन सके इस अवसर पर कार्यशाला मैं देवेश्वरी पवार, प्रमिला जोशी, शैलजा श्रीवास्तव, कंचन शर्मा, प्रदीप पटेल,चंदू जोशी , मधु माथुर, आशा मौर्य, रागिनी अग्रवाल, प्रसिद्धि जोशी, गीता सिंह, आशू नौटियाल, मानसी बिष्ट आदि प्रतिभागी ने गढ़वाली गीत बोलआंदा बद्री, अवध का गीत सासु की बीनी दरिया रे, भोजपुरी गीत अंगना न सोहे राजा तथा छोटी सी किशोरी, आज तो अवध में बधाई बाजे जैसे कई लोकगीतों का प्रशिक्षण ले रहे हैं


