कराची (सिंध) से शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा आज 120 से अधिक देशों तक पहुँची : जयंती दीदी
सिंधी समाज के स्नेह मिलन में जयंती दीदी ने सुनाई ब्रह्माकुमारीज की स्थापना की प्रेरणादायी गाथा

लखनऊ । ब्रह्माकुमारीज के नवनिर्मित राजयोग ट्रेनिंग सेंटर, गुलजार उपवन, सुल्तानपुर रोड में शनिवार शाम को सिंधी समाज के स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज संस्था की अतिरिक्त प्रशासिका प्रमुख एवं यूरोपीय निदेशिका राजयोगिनी जयंती दीदी ने सिंधी समाज के सदस्यों को संबोधित करते हुए संस्था की स्थापना, उसके ऐतिहासिक सफर और आध्यात्मिक संदेश के वैश्विक विस्तार की प्रेरणादायी जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ धनराज भाई द्वारा सिंधी समाज के सदस्यों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. राहुल रोहित आहूजा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज हमारा मन बीमार है और उसका प्रभाव हमारे तन पर भी दिखाई दे रहा है। हम सभी मूल रूप से मन और आत्मा हैं। ऐसे समय में देवी स्वरूप जयंती दीदी का सान्निध्य प्राप्त होना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। इसके पश्चात सुप्रसिद्ध गायक चांद बजाज ने दीदी के स्वागत में मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
सिंध प्रांत के कराची से हुई थी ब्रह्माकुमारीज की शुरुआत
जयंती दीदी ने संस्था के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारीज की स्थापना के शुरुआती तीन वर्ष सिंध प्रांत के कराची में ही बीते थे। बाबा ने इस ईश्वरीय आंदोलन की शुरुआत संदेश और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से की थी। संस्था की कई वरिष्ठ दादियाँ भी सिंध प्रांत से ही थीं। बाद में वे ईश्वरीय ज्ञान लेकर अफ्रीका एवं यूरोप के विभिन्न देशों में गईं और वहाँ ब्रह्माकुमारीज के सेवाकेंद्रों की स्थापना की। वर्ष 1950 में पूरा परिवार भारत के माउंट आबू आया, जहाँ से भारत में संस्था की सेवाओं का विस्तार प्रारंभ हुआ।
लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दादा राम और सावित्री बहन, जो स्वयं सिंधी समाज से थे, ने ही लखनऊ में संस्था के कार्य की शुरुआत की थी। इस प्रकार सिंधी समाज का ब्रह्माकुमारीज के इतिहास और उसकी आध्यात्मिक यात्रा से बहुत गहरा संबंध रहा है।
संगमयुग है अपने भविष्य का श्रेष्ठ भाग्य बनाने का समय
दीदी ने कहा कि आप सभी बहुत भाग्यशाली हैं। पूर्व जन्मों में किए गए पुण्य कर्मों का फल आज आप प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन अपने भविष्य को श्रेष्ठ बनाने के लिए वर्तमान समय में भी पुण्य कर्मों और आध्यात्मिक कमाई की आवश्यकता है। वर्तमान संगमयुग, अर्थात कलियुग और सतयुग के परिवर्तन का समय, आत्मिक उन्नति और श्रेष्ठ भविष्य बनाने का अमूल्य अवसर है।
उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज चारों ओर हिंसा, अशांति, तनाव और नकारात्मक भावनाएँ बढ़ती जा रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह वही परिवर्तनकारी समय है, जिसका संकेत श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के उस संदेश में मिलता है कि जब-जब धर्म की अति ग्लानि होती है, तब परमात्मा धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतरित होते हैं। आज परमात्मा के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग का संदेश विश्वभर में पहुँच रहा है।
विदेशों में भारतीय जीवनशैली और मेडिटेशन के प्रति बढ़ रहा आकर्षण
यूरोप एवं अन्य देशों में ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं का अनुभव साझा करते हुए जयंती दीदी ने कहा कि आज विदेशों में शाकाहार, समग्र जीवनशैली (Holistic Lifestyle) और मेडिटेशन के प्रति लोगों का आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है। ये सभी भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश भारतीय समाज धीरे-धीरे इन मूल्यों को भूलता जा रहा है, जबकि विदेशों के लोग इन्हें अपना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज का वैश्विक विस्तार किसी पूर्व निर्धारित योजना के तहत नहीं हुआ। बाबा का एक ही संकल्प था—सत्य धर्म की स्थापना। इसी संकल्प को लेकर सेवाधारी आगे बढ़ते गए और देखते ही देखते आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश विश्व के लगभग 120 देशों तक पहुँच गया। लगभग 40 वर्षों की इस यात्रा में अनेक लोगों का सहयोग और समर्पण जुड़ता चला गया तथा ब्रह्माकुमारीज एक वैश्विक आध्यात्मिक परिवार के रूप में विकसित हुई।
सिंधी समाज के लिए विशेष राजयोग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह
जयंती दीदी ने लखनऊ की सब-जोन इंचार्ज राजयोगिनी राधा दीदी से विशेष आग्रह किया कि सिंधी समाज के लिए एक विशेष रिट्रीट कार्यक्रम आयोजित किया जाए, जिसमें समाज के लोगों को दो-तीन दिन तक सेवाकेंद्र पर रहकर राजयोग मेडिटेशन का प्रशिक्षण प्राप्त करने और उसका गहन अनुभव करने का अवसर मिले। इससे सिंधी समाज के साथ आध्यात्मिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
विशिष्ट अतिथियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में पूर्व पार्षद नानक चंदानी , सुदामा चंदानी , सिंधी वेलफेयर के अध्यक्ष सत्येंद्र भावनानी, कोका-कोला के डायरेक्टर विवेक लधानी, क्लॉथ व्यवसायी वीरेंद्र खत्री, विनोद जी तथा प्रसिद्ध व्यवसायी मुरलीधर आहूजा सहित अनेक गणमान्य अतिथि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन सभी आगंतुकों को राजयोग मेडिटेशन की संक्षिप्त अनुभूति कराने तथा प्रसाद वितरण के साथ हुआ।



