डॉ. मीनू खरे को नई दिल्ली में प्रतिष्ठित ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया
जल संरक्षण के प्रति योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान

नई दिल्ली । जल संरक्षण, नदियों के पुनर्जीवीकरण और पर्यावरणीय जनजागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय योगदान के लिए डॉ. मीनू खरे को नई दिल्ली में प्रतिष्ठित ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
समारोह में देश के प्रख्यात जल संरक्षणविद् एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह, सांसद एवं पर्यावरण गतिविधियों के प्रमुख गोपाल आर्य, जैन मुनि लोकनाथ तथा कार्यक्रम के संयोजक अनिल कुमार सागर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। पद्मश्री सम्मानित उमाशंकर पांडेय, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) तथा आईआईटी कानपुर से जुड़े प्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों और जल विशेषज्ञों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए गठित ज्यूरी मंडल की अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. रंजन गोगोई ने की।
डॉ. मीनू खरे आकाशवाणी, लखनऊ में उपनिदेशक एवं कार्यक्रम प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुकी हैं। वे ब्लू ड्रॉप फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष तथा रेडियो ब्लू ड्रॉप की संस्थापक हैं। रेडियो ब्लू ड्रॉप के माध्यम से जल संरक्षण को केंद्र में रखकर जनजागरूकता, संवाद और व्यवहार परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य जल संरक्षण के संदेश को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाना तथा नदियों, तालाबों और अन्य जल निकायों के संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना है।
सम्मान प्राप्त करने पर डॉ. मीनू खरे ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए गौरव के साथ-साथ जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक दृढ़ करने की प्रेरणा है। उन्होंने नदियों के पुनर्जीवीकरण, जल निकायों के संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. खरे ने कहा कि जल जीवन का आधार है और नदियाँ हमारी जीवनरेखाएँ हैं। इनका संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। जल संकट की चुनौतियों से निपटने के लिए जनजागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और सतत प्रयासों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों से जल संरक्षण के साझा लक्ष्य के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।



