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डूटा (DUTA) ने उपराज्यपाल आवास तक निकाला कॉ लेजों में शिक्षण कार्य बंद रहा

दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के तत्काल नियमितीकरण और समायोजन की मांग की 

  1. नई दिल्ली , : दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा ) के आह्वान पर दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में भी शिक्षकों की स्थाई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु कराने की मांग को लेकर विभिन्न कॉलेजों से आए हजारों शिक्षक बुधवार, 23 सितंबर को कुलपति ( VC ) कार्यालय गेट नंबर 1 पर एकत्रित हुए । कॉलेजों में शिक्षण कार्य बंद रहा , उत्तरी परिसर में छात्र आएं मगर शिक्षकों ने क्लास नहीं ली । न्याय मार्च में हजारों शिक्षकों के इकठ्ठा होने के बाद साढ़े ग्यारह बजे उपराज्यपाल (LG) आवास तक मार्च निकाला । इस न्याय मार्च में दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों के शिक्षकों ने न्याय मार्च में बढ़ चढ़कर भाग लिया। शिक्षकों ने इन कॉलेजों में लंबे समय से चली आ रही तदर्थ (एड-हॉक) प्रथा और अनिश्चितता के खिलाफ आवाज उठाई। शिक्षक हाथों में तख्तियां लिए और नियमितीकरण के समर्थन में नारे लगाते हुए, शिक्षकों ने उपराज्यपाल हाउस तक मार्च किया निकाला और उपराज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। बता दें कि कुलपति कार्यालय पर अनेक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी , इनमें डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर वीएस नेगी, पूर्व डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार भागी , प्रोफेसर विमलेंदु तीर्थंकर, डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा , प्रोफेसर हंसराज सुमन , प्रोफेसर पंकज गर्ग, ईसी मेंबर डॉ. सुनील शर्मा , ईसी मेंबर मिथुराज , डॉ. राजीब रे , डॉ. सुरेंद्र कुमार सागर के अलावा डॉ. देवेंद्र राणा , डॉ. धनपाल सिंह , डॉ. विवेक कुमार धनकड़ , डॉ. भूपेन्द्र कुमार , , डॉ. चमन सिंह आदि भी उपस्थित रहे ।

डूटा के न्याय मार्च को उपराज्यपाल हाउस के निकट पुलिस ने रोक लिया , लगभग आधे घंटे तक शिक्षकों ने दिल्ली सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की । उसके बाद पुलिस ने उपराज्यपाल से बातचीत करने के लिए डूटा अध्यक्ष से आग्रह किया । डूटा अध्यक्ष के नेतृत्व में दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल से मिला और उन्हें एक विस्तृत याचिका भी सौंपी, जिसमें लंबे समय से लंबित मुद्दे के समयबद्ध समाधान के लिए उनके हस्तक्षेप और उचित निर्देशों की मांग की गई। दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेज है इनके रखरखाव व विकास का 100% अनुदान दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) सरकार से प्राप्त होता है। उन्हीं की प्रबंध समिति बनती है । डूटा के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी ने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी और दीर्घकालिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के विरुद्ध कार्य करने के बावजूद, इन कॉलेजों में बड़ी संख्या में शिक्षक पिछले पांच से बीस से अधिक वर्षों से तदर्थ/अस्थाई नियुक्तियों पर सेवा दे रहे हैं। ये शिक्षक निर्धारित योग्यता रखते हैं और अपने स्थायी समकक्षों के समान ही शिक्षण, परीक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, इसके बावजूद वे अपने कार्यकाल और सेवा लाभों को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

डूटा के सचिव प्रो. बिमलेंदु तीर्थंकर ने भी कार्यभार की स्थायी प्रकृति के बावजूद 120-दिवसीय नियुक्तियों, उसके बाद एक दिन के काल्पनिक (नॉटेशनल) ब्रेक और फिर से पुनर्नियुक्ति की निरंतर प्रथा पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह की लंबे समय से चली आ रही तदर्थ व्यवस्था ने पेशेवर असुरक्षा पैदा की है और संस्थागत स्थिरता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया है।
अपनी याचिका के माध्यम से, डूटा ने मांग की ।

विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन ने भी शिक्षकों को संबोधित किया । अपने संबोधन में प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कहा कि दिल्ली सरकार से पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में शिक्षकों की स्थाई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने से पहले शैक्षिक पदों का रोस्टर रजिस्टर तैयार करके उसे दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से पास कराकर समाज के सभी वर्गो को प्रतिनिधित्व दिया जाए । उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय और दिल्ली सरकार संयुक्त रूप से आरक्षित, श्रेणी के पदों जिसमें, शॉर्टफॉल और बैकलाग रिक्तियों को लागू करते हुए जल्द से जल्द 12 कॉलेजों में पात्र एवं लंबे समय से सेवारत शिक्षकों के एकमुश्त समायोजन और नियमितीकरण के लिए तौर-तरीके तैयार करें। प्रोफेसर सुमन ने काले कमेटी की रिपोर्ट को लागू करते हुए प्रिंसिपल पदों पर आरक्षण लागू करते हुए दिल्ली सरकार के कॉलेजों में नियुक्ति प्रक्रिया शुरु करें । डूटा ने दोहराया कि नियमित और दीर्घकालिक शैक्षणिक जिम्मेदारियों के लिए एक स्थिर और निरंतर शिक्षण कार्यबल की आवश्यकता होती है। संघ ने लंबे समय से जारी तदर्थवाद को समाप्त करने और दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों में सेवारत पात्र शिक्षकों के लिए सम्मान, सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई का आह्वान किया।

 

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