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जसदण पटारी हैंडीक्राफ्ट को जीआई मान्यता

नाबार्ड के समर्थन से गुजरात के पारंपरिक शिल्प का संरक्षण  

लखनऊ : जीआई रजिस्ट्री ने गुजरात के जसदण पटारी पारंपरिक शिल्प को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण की मान्यता दी है। राजकोट जिले के जसदण ब्लॉक के कारीगरों के लिए यह एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है। पीढ़ियों से प्रचलित यह अनोखा शिल्प गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल का प्रमाण है।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अपनी ग्राम्य विकास निधि (जीवीएन) के अंतर्गत इस जीआई पंजीकरण के लिए सहायता प्रदान की है। यह सहायता जीआई उत्पाद की जागरूकता बढ़ाने, दस्तावेजीकरण और जीआई आवेदन की प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराई गई है। पंजीकरण की प्रक्रिया सेंटर फॉर एनवायरमेंट एजुकेशन (सीईई) के माध्यम से की गई है।
इससे पहले, नाबार्ड ने गुजरात में दो अन्य उत्पादों- कच्छ की अजरख ब्लॉक प्रिंट (2021-22 में स्वीकृत) और अमलसाड चीकू, नवसारी (2020-21 में स्वीकृत) के लिए इसी तरह की सहायता उपलब्ध कराई थी। इन दोनों का जीआई पंजीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है।
जीआई टैग मिलने से प्रामाणिक शिल्प उत्पादों को नक़ल के समक्ष कानूनी सुरक्षा मिलती है, बाज़ार में उनकी पहचान बढ़ती है और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बेहतर अवसर मिलते हैं। कृषि उत्पादों के मामले में इससे किसानों के लिए मार्केट लिंकेज भी बेहतर होता है।
नाबार्ड ने बताया कि इस पहचान से पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही, ग्रामीण आजीविका बढ़ाने और युवा व महिला शिल्पकारों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने में भी यह सहायक सिद्ध होगा।

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