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DUJ की परिचर्चा में उठा नोएडा में मजदूर दमन का मुद्दा, सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा दमन नहीं, संवाद से आएगी श्रमशांति”

नई दिल्ली : दिल्ली पत्रकार संघ (DUJ) ने मंगलवार को कनॉट प्लेस स्थित अपने कार्यालय में मई दिवस, अपना 77वां स्थापना दिवस और विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस संयुक्त रूप से मनाया। इस अवसर पर “नोएडा श्रमिक आंदोलन” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें ट्रेड यूनियन नेताओं, अधिवक्ताओं और पत्रकारों ने भाग लिया।

मुख्य बिंदु
1. कार्यक्रम का शुभारंभ
बैठक की शुरुआत छात्र समूह ‘दस्तक’ के विरोध गीतों से हुई। DUJ के महासचिव जिगीश ए.एम. ने श्रम संहिताओं से पत्रकारों व मजदूरों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की।
2. नोएडा में मजदूर आंदोलन व दमन
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), नोएडा गौतमबुद्धनगर के जिला सचिव कामरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा ने बताया कि नोएडा में मजदूर आंदोलन के दौरान उन्हें 9 से 21 अप्रैल तक घर में नजरबंद रखा गया। सांसदों के हस्तक्षेप के बाद उनकी रिहाई हुई।
उन्होंने कहा कि महंगाई और हरियाणा में न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी की खबर के बाद नोएडा के मजदूरों ने समान वेतन की मांग उठाई, लेकिन प्रशासन ने बातचीत के बजाय दमन का रास्ता चुना। इस दौरान 1000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। लगभग 100 लोग अब भी जेल में हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रमिकों व ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने और दमन से औद्योगिक श्रमशांति बहाल नहीं होगी। इसके लिए श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर ठोस कार्रवाई और ट्रेड यूनियनों के साथ संवाद जरूरी है।
3. फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट
AILU सचिव संजय कुमार ने फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मजदूरों की गिरफ्तारियां गैरकानूनी थीं। परिजनों को सूचना तक नहीं दी गई और FIR की कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
4. ठेका प्रथा व कार्यदिवस पर चिंता
पत्रकार अंजलि देशपांडे ने कहा कि मारुति के खरखोदा प्लांट में एक भी स्थायी कर्मचारी नहीं है। रोबोट और ठेका मजदूरों से काम कराया जा रहा है। उन्होंने 1942 में डॉ. अंबेडकर के आठ घंटे कार्यदिवस और एक राष्ट्रीय वेतन के प्रस्ताव को याद किया।
5. पत्रकार-मजदूर एकता
DUJ अध्यक्ष सुजाता माधोक ने कहा कि ‘मजदूर बिगुल’ के संपादक सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी बताती है कि मजदूर और पत्रकार के अधिकार आपस में जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं के खिलाफ 1919 से DUJ का संघर्ष जारी है, लेकिन सरकार ने ज्ञापनों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
6. प्रेस की आजादी और वैश्विक संदर्भ
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सचिव अफजल इमाम, KUWJ अध्यक्ष प्रसून कंडाथ, वरिष्ठ पत्रकार फराज अहमद व एम.ए. काजमी ने प्रेस की आजादी का मुद्दा उठाया। काजमी ने बताया कि गाजा में 300 से अधिक पत्रकार मारे जा चुके हैं और फिलिस्तीनी पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं।
7. पूर्व संघर्षों का स्मरण
DUJ उपाध्यक्ष एस.के. पांडे ने बिहार प्रेस बिल के खिलाफ सफल आंदोलन और गिरफ्तार पत्रकार इफ्तिखार गिलानी व एम.ए. काजमी की रिहाई के संघर्ष को याद किया।
बैठक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हुई।

 

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