ऐतिहासिक दरगाह हज़रत अब्बास में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा
शिया वक्फ़ बोर्ड ने अवैध निर्माण रोकने के दिए सख्त निर्देश

लखनऊ। राजधानी के सहादतगंज स्थित ऐतिहासिक दरगाह हज़रत अब्बास में इन दिनों वक्फ़ बोर्ड के नियमों और कानून को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। यहाँ दरगाह परिसर के भीतर अवैध तरीके से दुकानों का निर्माण कराए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिस पर उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कड़ा संज्ञान लेते हुए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता दानिश राजा फाजिलनगर द्वारा प्रस्तुत किए गए ठोस साक्ष्यों और लिखित शिकायत की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। बोर्ड ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र जारी किया है, जिसमें दरगाह परिसर में चल रहे दुकानों के अवैध निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोकने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दरगाह प्रबंधन द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए परिसर में पहले से मौजूद तीन दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया और उनकी जगह बिना किसी अनुमति के छह नई दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। वक्फ़ अधिनियम के अनुसार, किसी भी निर्माण या आवंटन के लिए बोर्ड से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ इस कानून का सीधा उल्लंघन किया गया है। शिकायतकर्ता ने वित्तीय धोखाधड़ी को लेकर भी कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोप है कि दरगाह की बैलेंस शीट पर न तो सदर मौलाना कल्बे जवाद नकवी साहब के हस्ताक्षर हैं और न ही उप सचिव सैयद इस्तखार हुसैन मीसम के कोई सिग्नेचर मौजूद हैं। बिना किसी आधिकारिक सत्यापन के करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है, जो संस्थागत भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
इस पूरे प्रकरण पर बोर्ड ने वर्तमान मुतवल्ली मीसम रिजवी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि उच्चाधिकारियों की लिखित अनुमति के बिना किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह अवैध है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाले शिकायतकर्ता दानिश राजा ने सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि उन्हें लगातार धमकियाँ दी जा रही हैं। उन्होंने सलमान कटोरी, सलीम, फैजी, सेराज, मेंहदी अब्बास, लईक, गुलमेंहदी, शानू, रज़ा अब्बास और इब्ने हसन जैसे व्यक्तियों पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। इस खुलासे के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन और वक्फ़ बोर्ड की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


