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विद्याज्ञान की छात्रा रोली चौरेसिया ने जूनियर एनबीए राष्ट्रीय प्रतियोगिता में टीम को कांस्य पदक दिलाया

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के खरौनी गांव की 14 वर्षीय रोली चौरसिया ने वर्ष 2026 में नई दिल्ली में आयोजित जूनियर एनबीए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी प्रतियोगिता में टीम की कप्तानी करते हुए कांस्य पदक जीता। विद्याज्ञान लीडरशिप अकादमी, सीतापुर की कक्षा 10 की यह छात्रा 2023 में पहली बार बास्केटबॉल से परिचित हुई थीं और महज तीन वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर टीम की कप्तान बन गईं।

वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित जूनियर एनबीए राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में रोली ने 47 अंक बनाते हुए ‘सर्वाधिक अंक बनाने वाली खिलाड़ी’ का खिताब जीता और सर्वश्रेष्ठ टीम में स्थान पाया। अगले ही वर्ष दिल्ली में आयोजित जूनियर एनबीए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी प्रतियोगिता में उन्होंने कप्तान के रूप में टीम का नेतृत्व किया और कड़े राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के बीच कांस्य पदक दिलाया।

राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने से पूर्व रोली माध्यमिक शिक्षा बोर्ड प्रतियोगिताओं में कई स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं, राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और उत्तर प्रदेश उप-कनिष्ठ बास्केटबॉल प्रतियोगिता में लखनऊ मंडल टीम की कप्तानी करते हुए ‘प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ का सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं।

बास्केटबॉल में जहां लंबाई को प्रायः निर्णायक माना जाता है, वहीं रोली ने अपनी तेज़ी, फुर्ती और खेल की गहरी समझ को अपनी पहचान बनाया है। इन्हीं गुणों के बल पर वह राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर अपने से लंबे प्रतिद्वंद्वियों के बीच प्रभावी प्रदर्शन करती रही हैं।

रोली ने कहा, “जब मैंने बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस स्तर तक पहुंचूंगी या टीम का नेतृत्व करूंगी। अब मेरा लक्ष्य है कि मैं भारत का प्रतिनिधित्व करूं और अपने जैसी गांव की लड़कियों को यह दिखाऊं कि कोई भी सपना इतना बड़ा नहीं होता कि उसे हासिल न किया जा सके।”

विद्याज्ञान की प्राचार्या स्वाति शालिग्राम ने कहा, “रोली की उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब ग्रामीण भारत के प्रतिभाशाली बच्चों को सही वातावरण, प्रशिक्षण और अवसर मिलते हैं, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। यही विद्याज्ञान का मूल उद्देश्य है।”

विद्याज्ञान में खेल और शिक्षा को समान महत्व दिया जाता है। संस्थान आधुनिक खेल सुविधाएं, व्यावसायिक प्रशिक्षण और नियमित प्रतिस्पर्धी अवसर प्रदान करता है। वर्ष 2009 में शिव नादर फाउंडेशन द्वारा स्थापित विद्याज्ञान का उद्देश्य ग्रामीण भारत के मेधावी बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा के माध्यम से समग्र विकास के अवसर प्रदान करना है।

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