अर्श दोहावली” लोकार्पण एवं सम्मान समारोह

लखनऊ : साहित्य साधक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान लखनऊ के तत्वावधान में डाॅ. हिमान्शु सक्सेना “अर्श लखनवी” कृत “अर्श दोहावली- 1188 दोहा मनके” का लोकार्पण सहित वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश बहादुर सक्सेना “कैलाश कल्पित” की 101वीं जयंती स्वरूप “कैलाश कल्पित साहित्य साधक सम्मान- 2026 समारोह धूमधाम से रविन्द्रालय परिसर पुस्तक मेला चारबाग लखनऊ में सम्पन्न हुआ।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एवं कृति के कृतिकार डाॅ. हिमांशु सक्सेना “अर्श लखनवी”, कार्य० अध्यक्ष डाॅ. हरि शंकर मिश्र, मुख्य समागत, डा. सत्य प्रसाद द्विवेदी “पथिक”, विशिष्ट समागत कमल किशोर “भावुक” एवं मुख्य वक्ता डा. गोपाल कृष्ण शर्मा “मृदुल” के साथ माॅं शारदे एवं “कैलाश कल्पित” को दीपदान एवं पुष्पाचन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके उपरान्त तिभा गुप्ता द्वारा शारदे वंदन एवं रीमा सिन्हा द्वारा राष्ट्र वंदन कर माहौल को भक्तिभाव से ओत-प्रोत कर दिया। तदोपरांत मंचासीन अतिथियों का स्वागत प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र से किया गया। साथ ही डाॅ. अलका अस्थाना अमृतमयी ने सुमधुर अभिनन्दन गीत गा कर अभिवादन किया।
इसके उपरांत अरविंद रस्तोगी धवल ने कृतिकार के पितामह वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश बहादुर सक्सेना “कैलाश कल्पित” की 101वीं जयंती पर उनका परिचय देते हुए उनके व्यक्तित्व उपलब्धियों एवं कृतियों की चर्चा की।
तदोपरांत डाॅ० हिमांशु सक्सेना “अर्श” कृत पुस्तक (“अर्श दोहावली” – 1188 दोहा मनके) भव्य लोकार्पण सम्पन्न हुआ। जिसमें आशीर्वाद स्वरूप साहित्य भूषण दयानन्द जड़िया, डाॅ. गोपाल कृष्ण शर्मा मृदुल, डाॅ. दिनेश चंद्र अवस्थी,डॉ अरविंद रस्तोगी धवल ने शुभ आशीष अंकित किए । तदोपरांत वक्ता डाॅ. गोपाल कृष्ण “मृदुल” जी ने कृति पर बोलते हुए कहा– रहीम जी ने दोहा सतसई में 700 दोहे अंकित किए थे तो वहीं अर्श ने इस “अर्श दोहावली” में विभिन्न सार्थक विषयों पर लगभग दो गुने 1188 दोहे अंकित किए है। जिसमें अनेकों दोहे वर्तमान परिवेश को छूते है। पुस्तक में कई अंलकारिक, धार्मिक और सामाजिक दोहे अंकित हैं, जिनमें कुछ का पाठन करते हुए पुस्तक की भूरी-भूरी प्रशंसा की। साथ ही सभी को पुस्तक पढ़ने की सलाह दी।
इसके बाद कृतिकार डाॅ. हिमांशु सक्सेना ने पितामह कैलाश कल्पित को नमन कर लोकार्पित पुस्तक की विशेषताएं बताई व कुछ दोहो का पाठ कर सभी से पुस्तक को पढ़ने और पढ़कर अपने विचार व्यक्त करने का अनुरोध किया। साथ ही कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सबका आभार व्यक्त किया।
फिर क्रमशः कमल किशोर भावुक और डाॅ. सत्यदेव प्रसाद “पथिक” ने भी कृति से कई दोहा का वाचन कर पुस्तक की भूरी-भूरी प्रशंसा की। तदोपरांत कार्यक्रम का सफल संचालन कर रही भारती पायल ने सभी काव्य विभूतियों को अंगवस्त्र एवं “कैलाश कल्पित साहित्य साधक सम्मान” से अलंकृत करवाया।
इसके उपरांत कार्य. अध्यक्ष प्रो.डाॅ. हरि शंकर मिश्र ने अपने वक्तव्य में कैलाश कल्पित जी के साथ के अपने अनुभव साझा करते हुए, लोकार्पित कृति पर अपने विचार रखते हुए कहा, “दोहे की मारक क्षमता अद्भुत होती है” साथ ही कुछ दोहे पढ़कर अपना आशीष प्रदान किया। अंतोगत्वा संस्था के महामंत्री मनमोहन बाराकोटी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



