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चैती महोत्सव के मंच पर जीवंत हुआ आत्मा से परमात्मा के मिलन का महारास

श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा ऐशबाग रामलीला मैदान

लखनऊ। ऐशबाग के ऐतिहासिक रामलीला मैदान मे चल रहे भारतीय नववर्ष मेला एवं चैती महोत्सव के चौथे दिन के मंचन मे कंस और चाणूर संवाद, नारद और कंस संवाद के बाद शुरू होती है ब्रज की होली जिसमे सभी ब्रजवासी कान्हा के रंग में रंग जाते हैं, बरसाना की गोपियों और नंदगांव के ग्वालों के बीच खेली गई होली के दृश्यों को देख दर्शकों ने खूब तालियां बजाई ।

वहीं इंद्र देव गोकुल वासियों द्वारा अपनी पूजा बंद किए जाने से कुपित हो जाते हैं जिसके फलस्वरूप वे ब्रजमंडल में कई दिन तक लगातार बारिश कराते रहते हैं, इस भीषण बरसात से गोकुल वासियों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन लीला करते हुए पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लेते हैं जिसके नीचे छिप कर आम जन इंद्र के प्रकोप से हो रही वर्षा से राहत पाते हैं और बरसात खत्म होते ही जय कन्हैया लाल की जय का उद्घोष करते हुए हर्ष के साथ श्रीकृष्ण को अपने कांधों पर बिठा लेते हैं । इसके उपरांत देवऋषि नारद और विष्णु संवाद का मंचन किया जाता है और इसके बाद आरंभ होती है श्रीकृष्ण की रासलीला, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपनी बांसुरी की मधुर धुन बजाकर गोपियों को निधिवन में बुलाते हैं,
कृष्ण की बांसुरी की मधुर धुन सुनकर गोपियाँ अपने घरों को छोड़कर उनके पास आ जाती हैं कृष्ण गोपियों के साथ प्रेम और भक्ति के भाव से नृत्य करते हैं, यह नृत्य ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाता है ।
भगवान कृष्ण ने गोपियों की संख्या के अनुसार रूप धारण किए और सभी को अपने साथ रास करने का सौभाग्य दिया रास लीला गोपिकाओं द्वारा कृष्ण की भक्ति की पराकाष्ठा के दर्शन कराती है ।
रास और महारास में श्री कृष्ण और राधा की भूमिका में प्रथ्वीजीत साहा और नेहा राजवंशी के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा ।

कृष्णलीला के मंचन से पूर्व सांस्कृतिक मंच पर घृताक्षरी डांस स्टूडियो के कलाकारों द्वारा नमामि कृष्णम, मधुबन मैं राधिका, नीर भरन और महाभारत पर नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की गईं ।

श्री ऐशबाग रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को कृष्णलीला में कंस के बुलावे पर अक्रूर जी के साथ मथुरा कृष्ण और बलराम का मथुरा जाना, श्रीकृष्ण द्वारा अक्रूर जी को विराट स्वरूप के दर्शन देना, कुबजा उद्धार, शिव धनुष भंजन कर कंस का वध की लीलाओं का मंचन किया जाएगा ।

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