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ग्रामीण और शहरी युवाओं के लिए कृषि क्षेत्र में उद्यमिता की अपार संभावनाएं : विशाल सिंह चंचल

गाजीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र, पी० जी० कॉलेज, गाजीपुर में कृषि संकाय द्वारा बी.एस-सी. (कृषि) सातवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम अंतर्गत संचालित ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत “सतत कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह चंचल ने अपने संबोधन में कहा कि RAWE कार्यक्रम कृषि शिक्षा को व्यवहारिक एवं समाजोपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को ग्रामीण समुदायों से जोड़कर कृषि की जमीनी समस्याओं को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं, जो केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहरी युवाओं के लिए भी नए अवसर सृजित करती हैं। उचित प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर कृषि में सफल करियर बनाया जा सकता है।
RAWE कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. (डॉ.) जी. सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि स्नातक पाठ्यक्रम में RAWE को शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को कृषि एवं ग्रामीण विकास के वर्तमान और उभरते अवसरों व चुनौतियों से अवगत कराया जा सके। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को कुल 20 सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें एक सप्ताह महाविद्यालय परिसर में, पाँच सप्ताह कृषि विज्ञान केंद्र में, तीन सप्ताह प्लांट हेल्थ क्लिनिक में, आठ सप्ताह ग्राम स्तर पर किसानों के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण, तीन सप्ताह एग्रो-इंडस्ट्री में तथा एक सप्ताह परियोजना निर्माण एवं प्रस्तुतीकरण हेतु प्रशिक्षण शामिल है।
विशिष्ट अतिथि अपर जिलाधिकारी श्री दिनेश कुमार ने कहा कि आधुनिक कृषि में वैज्ञानिक तकनीकों और प्रबंधन के समावेश के कारण कृषि शिक्षा और कौशल का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसके माध्यम से न केवल पारंपरिक खेती में सुधार संभव है, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कृषि क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार संभावनाओं पर प्रकाश डाला और बताया कि कृषि क्षेत्र भारत के जीडीपी में 18 प्रतिशत एवं रोजगार सृजन में 41.2 प्रतिशत का योगदान है। वहीं, केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार सिंह ने छात्रों से आह्वान किया कि वे कृषि के प्रायोगिक ज्ञान को सर्वोपरि मानें, क्योंकि कृषि फार्म ही उनके लिए वास्तविक प्रयोगशाला है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने मृदा उर्वरता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाने पर बल दिया।
इस अवसर पर डॉ. योगेश कुमार, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. ओमकार सिंह, ई० आशीष कुमार बाजपेयी, डॉ. प्रमोद कुमार सिंह, सुनील कुमार सहित अन्य प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. (डॉ.) जी. सिंह ने किया।

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