डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र, वो डॉक्टर, जिसने मंच को बनाया समाज सुधार का नश्तर

लखनऊ : आमतौर पर एक डॉक्टर का काम अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित रहता है, लेकिन शाहजहाँपुर के डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र ने इस धारणा को बदल दिया। 1957 में हरदोई के ग्राम घसा में जन्मे डॉ. मिश्र ने महसूस किया कि शरीर के रोगों से कहीं ज्यादा खतरनाक समाज में फैली कुरीतियाँ और अज्ञानता है। बस, यहीं से शुरू हुआ चिकित्सा सेवा से समाज सेवा तक का एक अनूठा सफर।
डॉ. मिश्र ने केवल दवाइयाँ नहीं दीं, बल्कि कलम उठाकर नाटक लिखे और खुद मंच पर उतरकर समाज को आईना दिखाया। उनकी पत्नी नलनी मिश्रा ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया और नाटकों में मुख्य भूमिकाएँ निभाकर इस मिशन को नई ताकत दी। उनकी संस्था ‘सजन समाज सेवा समिति’ ने देश के कोने-कोने में चेतना जगाई।
डॉ. मिश्र के नाटकों ने समाज के हर दुखते नस पर प्रहार किया, नशा मुक्ति पतन स्मैक/गुटखा के खिलाफ और फैसला, बिदा टीबी पर और एक ही भूल पोलियो पर भागीरथी और गंगा मैया भला करें, कन्या भ्रूण हत्या, स्वच्छता, नारी सशक्तिकरण और जनसंख्या विस्फोट।
उनकी कला और जुनून का जादू ऐसा था कि शक्ति कपूर, सुदेश बेरी और अली खान जैसे बॉलीवुड कलाकार भी शाहजहाँपुर खिंचे चले आए। उनके इन्हीं कार्यों को देखते हुए उन्हें ‘जनपद रत्न’ जैसे कई सम्मान मिले। चर्चा है कि उनके समर्पण के कारण अब उन्हें सेंसर बोर्ड की सदस्यता और जल संरक्षण के लिए जल पुरुष सम्मान से भी नवाजा जा सकता है।
डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र ने यह साबित कर दिया कि हीरो सिर्फ पर्दे पर नहीं होते। जब एक पेशेवर डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी को सामाजिक मिशन बना लेता है, तो वह केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच का उपचार करता है। उनका पूरा परिवार जिसमें डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल हैं, आज समाज के लिए एक मिसाल है।



