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गिर सकती है धर्मेन्द्र ‘प्रधान’ पर गाज

देवेश पाण्डेय ‘देश’

एनसीईआर टी में यह कौन तय करता है कि किस स्तर के बच्चों को क्या पढ़ाया जाना चाहिये और क्या नहीं? मेरे विचार से विभाग के सर्वेसर्वा यानि धर्मेन्द्र प्रधान की जानकारी में ही यह सब तय किया जाता होगा। अगर धर्मेन्द्र प्रधान इस बात से इनकार करें तो इससे हास्यास्पद बात और कुछ भी नहीं हो सकती है। अगर आप किसी मंत्रालय के ‘प्रधान’ हैं और आपकी जानकारी के बगैर मंत्रालय की नीतियां तय की जाती हैं और निर्णय लिये जाते हैं तो ये उससे भी हास्यास्पद है। शिक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का मंत्री अगर यह कहे कि यह सब उसकी जानकारी में नहीं था, तो बड़े शर्म की बात है। एनसीईआरटी की किताब जो कक्षा आठ के बच्चों के लिए तैयार की गयी है उसमें ‘न्यायालय में भ्रष्टïाचार’ विषय पढ़ाकर आप उन्हें क्या सिखाना चाहते हैं? क्या आप यह सीखाना चाहते हैं कि जब न्यायालय में भ्रष्टïाचार है तो बड़े होकर आप भी भ्रष्टïाचार करो? या आप उन्हें यह बताना चाहते हैं कि भारत की नस-नस में भ्रष्टïाचार व्याप्त है। ‘न्यायालय में भ्रष्टïाचार’ विषय किसी बड़ी कक्षा में पढ़ाया जाता तब तो ठीक था, लेकिन 12-13 साल की उम्र के बच्चों को ‘न्यायालय में भ्रष्टïाचार’ पढ़ाना यह किसी भी दृष्टिï से ठीक नहीं है और इसे कोई भी भला मानुस ठीक नहीं ठहरायेगा। पुरानी किताब में न्यायपालिका की भूमिका, स्वतंत्र न्यायपालिका का मतलब, अदालतों की संरचनाओं एवं लोगों की पहुंच के बारे में जानकारी दी गयी थी। पुरानी किताब में पेंडिंग मामलों का जिक्र जरूर था, लेकिन न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टचार को लेकर कोई बात नहीं कही गयी थी। पुरानी किताब में न्याय में देरी, न्याय से वंचित की बात भी समझायी गयी थी। यहां तक तो ठीक था। इस चैप्टर को पुस्तक में परोसने से पहले यह भी ख्याल रखने की जरूरत थी कि कक्षा आठ के बच्चों को उनके मानसिक स्तर के अनुरूप ही शिक्षा देने की आवयश्कता होती है। पीएम मोदी इस पूरे घटनाक्रम से नाखुश हैं। धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा है कि जब यह मामला पीएम मोदी के संज्ञान में आया तो उन्होंने फौरन इस विषय को किताब वापस लेने का निर्देश दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हम न्यायपालिका का पूरी तरह सम्मान करते हैं। न्यायपालिका जो भी कहेगी, हम उसे मानेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, मैं इसके लिए अफसोस जाहिर करता हूं। प्रधान ने कहा कि जब यह मामला मेरे ध्यान में आया, तो मैंने तुरंत एनसीईआरटी को किताबें वापस लेने का निर्देश दिया, ताकि वे (उन्हें) आगे सर्कुलेट न करें।

धर्मेन्द्र प्रधान का मंत्राालय इससे पहले भी निकट भविष्य में भी ऐसी दो बड़ी गलतियां कर चुका है जिनमें से एक का रायता तो समेटे नहीं समेटा जा पा रहा है। एक तो नीट पीजी यानि राष्टï्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा- स्नातकोत्तर परीक्षा में सीटें न भर पाने के कारण माइनस अंक पाये परीक्षार्थियों को प्रवेश देना, कहां तक न्यायोचित है? क्या आप चाहते हैं कि देश में ऐसे लोग डाक्टर बने जिनको डाक्टरी का क, ख, ग तक नहीं मालूम है। क्या आप चाहते हैं कि ऐसे लोग डाक्टर बने जो मरीज को गलत दवाई देकर अथवा ऑपरेशन थिएटर में गलत ऑपरेशन करके मरीज को मौत की नींद सुला दें, आखिर आपकी मंशा क्या है? इससे बड़ी गलती तो इस मंत्रालय द्वारा यह की गयी कि यूजीसी में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर छात्रों में आपसी वैमनस्यता करने वाली गाइड लाइन्स बना डालीं। ऐसी गाइड लाइन्स जो कभी भी किसी भी सवर्ण छात्र पर आरोप लगाकर उसे विद्यालय से सीधे जेल पहुंचा देने वाली नीति थीं। यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 का उद्देश्य कहने को तो विश्वविद्याालयों में जाति, धर्म और लिंग आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना था। लेकिन इनसे वास्तव में ऐसा कतई नहीं होता, होता यह कि कोई भी एससी, एसटी अथवा पिछड़ा छात्र किसी भी सवर्ण लडक़े को यह कहकर ही कि मेरे मन में यह विचार आ रहा है कि इसे मेरी शक्ल अच्छी नहीं लग रही है, अथवा मेरे मन यह विचार आ रहा है कि यह मन ही मन में मुझे जाति सूचक शब्दों से सम्बोधित कर रहा है, जेल भेजवा सकता है। सामान्य वर्ग के लोगों और संगठनों का यह आरोप था कि ये नियम अस्पष्टï है और और इनका उपयोग सवर्ण छात्रों अथवा शिक्षकों के विरूद्घ फर्जी शिकायतें दर्ज करने के लिए किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर तत्काल संज्ञान लिया और उसने माना कि ये नियम समाज को विभाजित कर सकते हैं और उनके दूरगामी कुपरिणाम हो सकते हैं। सवसो तो भला हो सुप्रीम कोर्ट का जो उसने एक याचिका के माध्यम से इन गाइड लाइन्स पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी अन्यथा पूरे देश में आन्दोलनों का दौर शुरु हो जाता और अराजकता का माहौल फैल जाता।

इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद भी धर्मेन्द्र प्रधान ने ठीक इसी तरह से इन गाइड लाइन्स को लेकर अपनी अनभिज्ञता जतायी थी। आपकी नाक के नीचे सब कुछ हो जाता है, आपको कुछ पता ही नहीं लगता है तो आप अपनी कुर्सी पर बैठकर क्या देख रहे हो और कैसे आपकी बिना जानकारी के सब कुछ हो जाता है। इससे तो अच्छा है यह जिम्मेदारी आप किसी और को यह जिम्मेदारी सौंप दें और घर पर आराम फरमायें। धर्मेन्द्र प्रधान अपनी अर्कमण्यता से कई बार प्रधानमंत्री की छीछालेदर करवा चुके हैं, लेकिन अब और नहीं।

 

 

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