वेदांता लिमिटेड ने तीसरी तिमाही में दर्ज किए रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ेः मुनाफ़ा 60 फीसदी बढ़कर ₹7,807 करोड़ पर पहुंचा, राजस्व में 19% फीसदी की बढ़ोतरी

लखनऊ : वेदांता लिमिटेड ने 31 दिसम्बर 2025 को समाप्त होने वाली तीसरी तिमाही एवं नौ महीनों की अवधि के लिए अपने अलेखापरीक्षित समेकित परिणामों की घोषणा की। कर के बाद मुनाफ़ा 60 फीसदी सालाना बढ़कर ₹7,807 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी ने रिकॉर्ड स्तर का तिमाही एबिट्डा ₹15,171 करोड़ दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 34% की वृद्धि को दर्शाता है। यह प्रदर्शन मार्जिन में 629 बेसिस पॉइंट्स के विस्तार के परिणामस्वरूप मार्जिन 41%* तक पहुँचने से समर्थित रहा।
कंपनी ने अब तक का अधिकतम त्रैमासिक राजस्व ₹45,899 करोड़ दर्ज किया, जिसमें 19 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी हुई है।
वेदांता का नेट डेब्ट टू एबिट्डा रेशो 1.40x से बेहतर होकर 1.23x पर पहुंच गया, साथ ही रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड 27 फीसदी पर रहा, इसमें सालाना 296 बीपीएस की बढ़ोतरी हुई। वेदांता के डिमर्जर से जुड़े एनसीएलटी आदेश के बाद, क्रिसिल और इक्रा दोनों ने कंपनी की क्रेडिट रेटिंग को AA स्तर पर बरकरार रखा है।
वित्तीय वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए, अरुण मिश्रा, एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर, वेदांता लिमिटेड ने कहा, “वित्तीय वर्ष 26 की तीसरी तिमाही वेदांता के लिए बेहतरीन रही है, कंपनी ने अब तक का अधिकतम ₹15,171 करोड़ का एबिट्डा दर्ज किया, और हमारे दो व्यवसायों ने अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ वित्तीय परिणाम हासिल किए। एलुमिना एवं एलुमिनियम के रिकॉर्ड उत्पादन के चलते एलुमिनियम ने प्रति टन $1,268 का EBITDA मार्जिन दर्ज किया। ज़िंक इंडिया ने अब तक का अपना सर्वाधिक तिमाही एबिट्डा ₹6,064 करोड़ दर्ज किया, जो रिकॉर्ड खनन एवं परिष्कृत धातु उत्पादन से प्रेरित रहा, जिसमें कुल लाभ में चांदी का योगदान 44 फीसदी रहा। ज़िंक इंटरनेशनल ने उत्पादन में 28 फीसदी सालाना का योगदान दिया, इसमें गैम्सबर्ग ने अब तक की अधिकतम रिकवरी हासिल की है। हमारे ऑयल एवं गैस व्यवसाय ने भारत की पहली सबसी टेम्पलेट स्थापना के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जबकि थर्मल पावर व्यवसाय ने सेल्स वॉल्युम में 62 फीसदी वृद्धि के साथ एबिट्डा में 188 फीसदी सालाना की वृद्धि दर्ज की। आयरन ओर, स्टील और फेरोक्रोम ने भी रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया। स्टील बिलेट्स का उत्पादन 285 किलोटन रहा और फेरोक्रोम का उत्पादन भी 32 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा। पांच प्योर प्ले संस्थाओं में डीमर्जर के अनुमोदन के साथ ये परिणाम हमारे संचालन की मजबूती को दर्शाते हैं। इनसे स्पष्ट है कि हम वेदांता 2.0 की यात्रा में भी तीव्र विकास के लिए तैयार हैं।“
वेदांता ने वित्तीय वर्ष 26 के नौ महीनों में ग्रोथ कैपेक्स में तकरीबन USD 1.3 बिलियन का निवेश किया। कंपनी ने तिमाही के दौरान संचालन का मजबूत प्रदर्शन दिया है, सभी मुख्य कारोबारों में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया। एलुमिनियम का त्रैमासिक उत्पादन अब तक का अधिकतम 620 किलोटन रहा, जिसमें 1 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी हुई। वहीं एलुमिना का उत्पादन 57 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी के बाद रिकॉर्ड 794 किलोटन पर पहुंच गया। ये आंकड़े संचालन की बेहतर दक्षता एवं सुधार की दिशा में की गई पहलों की पुष्टि करते हैं। जिंक इंडिया ने अब तक अधिक अधिकतम तीसरी तिमाही का खनित धातु उत्पादन 276 किलोटन दर्ज किया, जिसमें 4 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी हुई। इसी तरह रिफाइन्ड मैटल का उत्पादन भी 4 फीसदी सालाना की दर से बढ़कर 270 किलोटन पर पहुंच गया। गौरतलब है कि जिंक इंडिया ने पिछले पांच सालों में तीसरी तिमाही की सबसे कम उत्पादन लागत दर्ज की है, जो 10 फीसदी सालाना की दर से कम होकर 940 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। ज़िंक इंटरनेशन संचालन में भी उत्पादन 28 फीसदी सालाना बढ़कर 59 किलोटन पर पहुंच गया।
आयरन ओर के कारोबार ने 1.2 मिलियन टन का त्रैमासिक सीलेबल ओर उत्पादन दर्ज किया, जिसमें 3 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी हुई। वहीं पिग आयरन का उत्पादन 6 फीसदी सालाना बढ़ोतरी के बाद 229 किलोटन पर पहुंचा। कॉपर कैथोड़ का उत्पादन सालाना बढ़कर 45 किलोटन पर पहुंच गया, यह पिछले सात सालों में अधिकतम त्रैमासिक उत्पादन रहा। फेरो क्रोम का उत्पादन 32 फीसदी सालाना की ज़बरदस्त बढ़ोतरी के बाद 24 किलोटन पर पहुंचा। पावर व्यवसाय ने मजबूत प्रदर्शन किया, जिसमें बिक्री में सालाना आधार पर 61 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।



