राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़े बदलाव लाने वालीं भारत की शीर्ष सबसे शक्तिशाली महिला राजनेता

डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता उसकी विविधता, समावेशिता और निरंतर विकास है। इस
लोकतंत्र की आत्मा में महिलाओं का नेतृत्व एक ऐसी सशक्त धारा के रूप में उभरा है जो न केवल सत्ता के
शीर्ष पदों पर काबिज है, बल्कि समाज के हर वर्ग को न्याय, अवसर और सम्मान प्रदान करने में अग्रणी
भूमिका निभा रही है। आज भारत में महिला नेतृत्व को वैश्विक मंच पर भी व्यापक सराहना मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों और प्रतिष्ठित सूचियों में भारतीय महिला नेताओं की लगातार मौजूदगी इस बात का
प्रमाण है कि भारत न केवल विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त
और प्रेरणादायी मॉडल भी बनकर उभर रहा है। आजाद भारत की इस सूची में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
से लेकर वर्तमान केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल तक कई प्रभावशाली नाम शामिल हैं।
भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली
शख्सियतों में से एक हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ऐतिहासिक विजय
प्राप्त की, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। बैंकों का राष्ट्रीयकरण, गरीबी हटाओ जैसे
नारे, हरित क्रांति की शुरुआत और 1974 का परमाणु परीक्षण जैसे साहसिक फैसले उनके कार्यकाल की
पहचान हैं। इस कड़ी में पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारतीय राजनीति की सबसे लोकप्रिय और
प्रभावशाली महिलाओं में शुमार हैं। उनकी वक्तृत्व कला संसद से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक गूंजी। विदेश नीति
को उन्होंने मानवीय चेहरा दिया। सोशल मीडिया के माध्यम से संकटग्रस्त भारतीयों की मदद कर उन्होंने
एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। पासपोर्ट, वीजा और विदेश में फंसे नागरिकों की समस्याओं का त्वरित
समाधान उनकी पहचान बना। कोई दो राय नहीं कि सुषमा स्वराज ने महिला नेतृत्व को संवेदनशील,
पहुंचयोग्य और जनकेंद्रित बनाया।
वर्तमान भारतीय राजनीति में अनुप्रिया पटेल एक ऐसी युवा नेता हैं जो सामाजिक न्याय, संगठनात्मक
मजबूती, महिलाओं का सशक्तिकरण और युवा नेतृत्व का प्रतीक बनकर उभरी हैं। अपना दल (एस) की
राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्र सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री के
रूप में वे निरंतर सक्रिय हैं। कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश कर उन्होंने पिछड़े वर्गों, दलितों, वंचितों
और उपेक्षित समुदायों की आवाज को संसद और सत्ता के गलियारों तक पहुंचाया। वे टीबी उन्मूलन
कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और कोविड जैसी महामारियों के दौरान स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में
महत्वपूर्ण योगदान दे चुकी हैं। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दशकों के वामपंथी शासन
को चुनौती देकर सत्ता परिवर्तन का एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। सादगी, जुझारूपन और जनता
से सीधा जुड़ाव उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत है। कन्याश्री, रूपश्री, स्वास्थ साथी और लक्ष्मीर
भांडार जैसी क्रांतिकारी योजनाओं से उन्होंने महिलाओं, बालिकाओं और गरीब परिवारों का जीवन बदला।
ममता बनर्जी ने दिखाया कि राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है और जमीनी संघर्ष से बड़ी से बड़ी
सत्ता को बदला जा सकता है।
उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती भारतीय राजनीति में दलित सशक्तिकरण की सबसे बड़ी
प्रतीक हैं। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अंबेडकर और कांशीराम की विचारधारा
को आगे बढ़ाते हुए दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों को राजनीतिक शक्ति और आत्मसम्मान प्रदान किया।
वहीं तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और अन्ना डीएमके की सर्वोच्च नेता जयललिता (अम्मा) भारतीय
राजनीति की सबसे करिश्माई महिलाओं में से एक थीं। फिल्म जगत की सुपरस्टार से राजनीति में प्रवेश कर
उन्होंने एम.जी. रामचंद्रन की विरासत को आगे बढ़ाया। छह बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने तमिलनाडु को
विकास के नए आयाम दिए। जयललिता ने महिला नेतृत्व को करिश्मा, साहस और जनप्रियता का चेहरा
दिया। उनकी कमी आज भी तमिलनाडु की राजनीति में खलती है।
वर्तमान वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री रह चुकी निर्मला सीतारमण भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त
मंत्री हैं। वैश्विक आर्थिक संकटों, कोविड महामारी, यूक्रेन संकट और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच
उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, स्थिरता और तेज विकास की राह पर बनाए रखा। आत्मनिर्भर
भारत अभियान, उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाएं, स्टार्टअप इंडिया को बढ़ावा और महिलाओं-युवाओं
पर केंद्रित बजट प्रावधान उनके नेतृत्व की विशेषताएं हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और
ताई के नाम से लोकप्रिय सुमित्रा महाजन भारतीय राजनीति में संसदीय परंपराओं और अनुशासन की
सबसे बड़ी मिसाल हैं। 1989 से 2019 तक इंदौर से लगातार आठ बार लोकसभा सांसद चुनी जाने वाली
वे देश की पहली महिला हैं जिन्होंने एक ही सीट से इतनी लंबी सेवा दी। 2014 से 2019 तक 16वीं
लोकसभा की स्पीकर रहते हुए उन्होंने सदन की कार्यवाही को निष्पक्षता और गरिमा प्रदान की। उनकी
लंबी संसदीय यात्रा भारतीय लोकतंत्र में महिला नेतृत्व की मजबूती का प्रमाण है।
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती भारतीय राजनीति में हिंदुत्व,
सामाजिक न्याय और जल संरक्षण की सबसे जुझारू आवाज हैं। साध्वी के रूप में जानी जाने वाली और
2003 में मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनकर उभरीं उमा भारती ने कांग्रेस के लंबे शासन को समाप्त किया और
राज्य में विकास की नई लहर की शुरुआत की। उमा भारती ने महिला नेतृत्व को साहस, त्याग और
राष्ट्रभक्ति का चेहरा दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी
डिंपल यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक शांत लेकिन मजबूत आवाज हैं। मैनपुरी और कन्नौज से
सांसद रह चुकीं डिंपल महिलाओं, परिवार, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर संसद में सक्रिय रहती हैं।
डिंपल यादव कम शब्दों में प्रभावी तरीके से मुद्दे उठाती हैं और युवा पीढ़ी की महिलाओं के लिए एक आदर्श
प्रस्तुत करती हैं।



