बिल्डरों के फावड़े, पुलिस की चुप्पी, और विकास का चूरन!

मोहम्मद सैफ
लखनऊ का अमीनाबाद, जहां पुरानी हवेलियां इतिहास की गाथा सुनाती हैं, वहां अब बिल्डरों के फावड़े रात के अंधेरे में तांडव मचा रहे हैं! मौलवीगंज चौकी से बस दस कदम की दूरी पर, अवैध खनन का धंधा जोर-शोर से चल रहा है। दिन ढलते ही मशीनें गरजती हैं, और पुलिस? अरे, वो तो बस छोटे-मोटे ठेले-पटरी वालों के पीछे डंडा भांजती है। बड़े बिल्डरों के सामने तो उनका डंडा भी साइलेंट मोड में चला जाता है, शायद बिल्डरों की जेब में वो खास ताकत जो होती है!
खनन अधिकारी, एलडीए, और नगर निगम के बाबू लोग कुंभकरणी नींद में डूबे हैं। मूसलाधार बारिश में भी बेसमेंट खोदे जा रहे हैं, जो कभी भी किसी इमारत को निगल सकते हैं। पर ये लोग जागेंगे कब? शायद तब, जब कोई बड़ा हादसा हो, एक सिपाही सस्पेंड हो, दो-चार का ट्रांसफर हो, और सरकार की तरह से मुआवजे की मलाई बंटेगी। फिर सब शांत, जैसे कुछ हुआ ही न हो!
थाने में भी माहौल चिल है। थाना प्रभारी अपने खास बिल्डरों की मस्ती में मशगूल हैं। कोई गरीब नाली खोदे, तो सिपाही परमिशन का डंडा लेकर दौड़ पड़ता है, लेकिन बिल्डरों के बेसमेंट? अरे, वो तो फ्री पास में चल रहे हैं! ये सब देखकर लगता है, ये लापरवाही नहीं, बल्कि पक्की मिलीभगत है। मुख्यमंत्री योगी जी का विकास का सपना तो इन बिल्डरों और बाबुओं की जेब में दबकर चूरन हो रहा है।



