संभल दंगों पर उठे सवाल, क्या अदालती कमीशन की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है ?: मो. मतीन खाँ

संभल : उत्तर प्रदेश में हुए दंगों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय अदालती कमीशन की रिपोर्ट ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, उत्तर प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मतीन खाँ ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए इसे आरएसएस कार्यालय में तैयार की गई, बताया है। उनकी यह प्रतिक्रिया कई गंभीर सवाल खड़े करती है, खास तौर पर रिपोर्ट की निष्पक्षता और इसकी जांच प्रक्रिया को लेकर।
डॉ. मतीन खाँ ने रिपोर्ट पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, इस तथाकथित जांच टीम में शामिल जैन वकील और जैन अधिकारी की भूमिका पक्षपातपूर्ण नजर आती है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में न तो दंगे में मारे गए लोगों का जिक्र है और न ही घायलों की पीड़ा को दर्ज किया गया है, जो जांच के मूल उद्देश्य के खिलाफ है। सबसे बड़ा आरोप उन्होंने पुलिस की बर्बरता पर लगाया। उनके अनुसार, रिपोर्ट में पुलिस की दमनात्मक भूमिका पर एक शब्द भी नहीं लिखा गया, जिससे यह साफ होता है कि रिपोर्ट एकतरफा और अन्यायपूर्ण है।
डॉ. खाँ ने रिपोर्ट की विषय-वस्तु पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट सिर्फ अधूरी नहीं, बल्कि पीड़ितों के साथ अन्याय भी करती है। इसमें न तो मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की सिफारिश की गई है और न ही निर्दोषों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने का कोई जिक्र है। डॉ. खाँ का कहना है कि रिपोर्ट का फोकस आबादी के आधार पर है, जो कि मामले को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश है।
उन्होंने आगे कहा कि रिपोर्ट में 2750 लोगों को निशाना बनाया गया है, जिनमें समाजवादी पार्टी के सांसद, विधायक पुत्र और मस्जिद कमेटी के जिम्मेदार शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि रिपोर्ट तथ्यों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक आधार पर तैयार की गई है।
डॉ. मतीन खाँ ने रिपोर्ट में दहशतगर्द तंजीमें आतंकवादी संगठन के पैर फैलाने के जिक्र पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर ऐसा है, तो यह सीधे-सीधे सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी को दर्शाता है। उनका मानना है कि रिपोर्ट का मकसद दंगों की असल वजहों और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना होना चाहिए था, न कि इसे धार्मिक रंग देना।
अंत में, डॉ. खाँ ने कहा कि संवैधानिक संस्था से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन इस रिपोर्ट ने आयोग की निष्पक्षता पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दंगों के वास्तविक तथ्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित किया जाए।



