ईद मिलादुन्नबी का जश्न और शिक्षा का महत्व
जामिया बहरुल उलूम फिरंगी महल में 12 दिवसीय जश्ने ईद मिलादुन्नबी

लखनऊ : लखनऊ में ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन की देखरेख में ईद मिलादुन्नबी के जश्न के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, जामिया बहरुल उलूम फिरंगी महल में 12 दिवसीय जश्ने ईद मिलादुन्नबी का सिलसिला चल रहा है।
मौलाना अब्दुल कुद्दूस ने फरमाया कि जब पैगंबर मुहम्मद का जन्म हुआ था, तो रात जा रही थी और सुबह हो रही थी। उस समय तीन सफेद झंडे लगाए गए थे, एक काबा पर, एक पूर्व में और एक पश्चिम में। इसी कारण, रबीउल अव्वल के महीने में हम झंडे लगाकर खुशी मनाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि तालीम का हासिल करना हर छोटे-बड़े पर फर्ज है।
मौलाना तौसीफ ने लोगों से अपने घरों को साफ और सजाने, छतों पर झंडे लगाने और मिलाद शरीफ की महफिलें आयोजित करने का आग्रह किया, ताकि अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा हासिल हो सके।
उन्होंने शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया और कहा कि हमारे रसूल ने शिक्षा पर बहुत जोर दिया। उन्होंने कहा कि तालीम हासिल करने के लिए अगर चीन भी जाना पड़े तो जाओ, जबकि उस समय चीन का कोई अस्तित्व भी नहीं था।
मौलाना तौसीफ ने कहा कि हमें शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, भले ही इसके लिए एक वक्त भूखा ही क्यों न रहना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अपने बच्चों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना हम सब का फर्ज है, क्योंकि यह दुनिया और आखिरत दोनों के लिए फायदेमंद है।
मौलाना अफ्फान अतीक फिरंगी महली ने जानकारी दी कि 5 सितंबर को जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाला जाएगा, जो मखदूम शाह मीना शाह की दरगाह से शुरू होकर ज्योतिबा फुले पार्क में एक जलसे में बदल जाएगा।
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख लोगों ने भाग लिया, जिनमें सैयद इकबाल हाशमी, एडवोकेट मो आमिर और कारी शकील निजामी शामिल थे।



