डीयू मोदी जी की डिग्री छुपाने के बजाये एकेडमिक उपलब्धि हासिल करता तो अच्छा रहता : शाहनवाज़ आलम

नयी दिल्ली : केंद्रीय सूचना आयोग का दिल्ली यूनिवर्सिटी को पीएम मोदी की डिग्री सार्वाजनिक करने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा ख़ारिज कर दिए जाने को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि इस फैसले से हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया है कि मोदी जी वास्तव में नॉन बायोलॉजिकल व्यक्ति हैं. जिनका जन्म से लेकर शादी और डिग्री तक सबकुछ रहस्यमयी है.
शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि पीएम मोदी का डिग्री इतना रहस्यमयी है कि 2016 में केंद्रीय सूचना आयोग ने 1978 में बीए का एग्जाम पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड की जांच की अनुमति देते ही दिल्ली विश्वविद्यालय अपने इस कथित नॉन बायोलॉजिकल छात्र की डिग्री छुपाने के लिए सीधे हाई कोर्ट चला गया था. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य ही है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी पिछले एक दशक से किसी एकेडमिक उपलब्धि के बजाये पीएम मोदी जी की डिग्री छुपाने के प्रयासों के लिए ही चर्चा में रहा है.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि विश्वविद्यालय और न्यायालय का मोदी जी की डिग्री छुपाने में किया गया अथक प्रयास इन दोनों संस्थाओं की दयनीय स्थिति को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि जब दुनिया और देश भर की शैक्षणिक संस्थाएं अपने छात्र रहे नेहरू, गांधी और डॉ अम्बेडकर की डिग्रीयां गर्व से सार्वजनिक कर सकती हैं तो मोदी जी की डिग्री को भी दिल्ली यूनिवर्सिटी को छुपाना नहीं चाहिए था.



