देशभक्ति काव्य संग मनायी गुरू टैगोर की 164 वी जयंती

लखनऊ । एशिया मे प्रथम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित विश्व को विशेष रविन्द्र संगीत की धुनो से एकता के सूत्र मे बाधने गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर की 164 जयंती को धूमधाम से मनाया ।स्थानीय “रविन्द्र उपवन” हजरतगंज मे लखनऊ बंगीय नागरिक समाज के संयोजक पी के दत्ता की अगुवाई मे नागरिको ने
गुरुदेव की विशाल मूर्ति पर वंदे मातरम के उद्घोघोष के साथ माल्यार्पण किया। मुख्य अतिथी रोहित अग्रवाल की उपस्थित मे पहलगाम के शहीदो को याद करते हुए को 2 मिनट के मौन के साथ अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की गयी ।
कृष्णानद राय एवं मुकेशानंद एवम सदस्यो ने बंगीय समाज की ओर से गुरुदेव की जयंती को पुष्पित पल्लवित करने के लिए में वृक्षारोपण किया।तत्पश्चात गुरुदेव को वाणी वंदना से नमन करते हुए देशभक्ति से परिपूर्ण काव्य पाठ का आगाज हुआ।
सुश्री रत्ना बपुली, माधवी मिश्रा, विजय मौर्या, निशा सिंह नवल, अलका अस्थाना, ज्योती किरन रतन, श्री रामराज भारती ,आर एस निगम, कृष्णानंद राय, मुकेशानंद, गोवर गणेश, शरद पान्डे शशांक,’ संजय मल्होत्रा हमनुवा, महेश चन्द गुप्ता , मनमोहन बाराकोटि , कुलदीप शुक्ला आदि कवियो ने अपने उद्गार गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर एवम देश के प्रति भावनाये अपनी रचनाओ के माध्यम से प्रस्तुत की । बंगीय समाज के सबसे वरिष्ठ सदस्य आर एस निगम जी की पुस्तक ” सरस काव्य गुल्दस्ता” का विमोचन् एवं बंगीय समाज का तिमाही फोल्डर” आमरा
बान्गली ” का विमोचन हुआ । अंत मे गुरु देव रविन्द्र नाथ टैगोर जी की प्रतिमा के समक्ष शमां रौशन करते हुए राष्ट्र गान के साथ समापन किया।
गुरूदेव की जयंती को सफलतापूर्वक संपन्न कराने मे महंत देवया गिरि , सुधीर हलवासिया एव रोहित अग्रवाल महत्व पूर्ण योगदान रहा, साथ ही सर्व श्री एन सी अग्रवाल, एस सी सिंघल, पल प्रवीण, के जे टडन, राजन दत्ता, एस एन पाल, दी के पाल, निहार डे, कुवर मार्तण्ड अशोक डे ,नितिन डे, अम्बेश प्रकाश मिश्र, ए के सक्सेना, सुश्री ज्योत्श्ना सिंह, मालविका दत्ता, अर्चना कश्यप ज्योती गुप्ता हर्ष कुमार राय, ए पी सिंह, अहिद अख्तर, महताब आलम, सज्जन तिवारी, अमित बोस, एवं दीपक हालदार सदस्यो ने बंगीय नागरिक समाज के एक दिवसीय आयोजन को लगातार उपस्थित रहकर अपना योगदान । मुख्य समाज सयोजक पी के दता ने दुख जताते हुए कहा की गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर उनके 164 वे जन्मदिन पर 363 दिन की तरह आज भी अन्धेरे में ही रहे होते, यदि हमारी संस्था यहा प्रकाश की व्यवस्था न करते। क्योकि गुरुदेव की मूर्ति तो लगी लेकिन परकाश व्यवस्था नही है। पी के दता ने दुख जताया कि वर्षो के प्रयासो के बाद भी , हमारे निवेदन पत्र नगर निगम निगम एवं विकास प्राधिकरण से उत्तर विहीन है।



