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मुसलमानों के रहनुमा बनते बनते कथित समाजवादी नेता हिंदुओं व मुसलमान दोनों के दुश्मन बन बैठे

विनोद बंसल
भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में अपनी ऊंची आवाज में जिहादियों की तरह लाल पीले अंदाज में सपा सासंद ने दुस्साहस पूर्वक कहा-“मैं जानना चाहूंगा कि बाबर को आखिर लाया कौन? इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा लाया था। मुसलमान अगर बाबर की औलाद हैं तो तुम लोग उस गद्दार राणा सांगा की औलाद हो.”
हमारे साहसिक इतिहास के महान् गौरव, राणा सांगा और उनसे प्रेरणा लेने वाले समाज को “गद्दार” बता कर पार्टी ने ना सिर्फ हिंदू समाज का घोर अपमान किया है अपितु सदन को शर्मसार कर वीरों की जननी राजस्थान पर भी गहरा आघात किया है।
भारत के सभी मुसलमानों को ‘बाबर की औलाद’ बताना भी क्या मुस्लिम समाज का भी घोर अपमान नहीं? इस पर मुस्लिम संगठनों की चुप्पी अनेक संदेहों को जन्म देती है।
शर्म आनी चाहिए कि जिनका नाम ‘रामजी’ से शुरू होता है, उनके होठों पर ‘औरंगजी’ बसते हैं। जिहादी तुष्टिकरण में आकंठ डूबी इस पार्टी को शायद इसीलिए लोग समाजवादी की जगह नमाजवादी अधिक मानते हैं!! इन्हें धर्मांतरण के सरगना ‘सूफी’ तो ‘संत’ नजर आते हैं किंतु हिंदू ‘गद्दार’!!
ये महाशय व इनके पार्टी प्रमुख यदि अविलंब क्षमा याचना नहीं करते तो जनता तो इनको जबाव देगी ही, राज्यसभा के माननीय सभापति महोदय से भी निवेदन है कि वे इन्हें इस महा-दृष्टता के लिए सदन से बाहर निकालें।

संसद में संसदीय मर्यादाओं को तार-तार कर सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने वो काम किया है, जो इस पार्टी के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी।
इन जिहादियों और आक्रांताओं के पैरोकारों को कब ज्ञान होगा कि राणा सांगा ऐसे वीर योद्धा थे जिनके पास एक हाथ और एक आंख नहीं थी।उनके शरीर पर 80 घाव थे और वे चलने में लंगड़ाते थे किंतु फिर भी उनके शत्रु उनसे थर्राते थे।
क्या अभी ये हिंदू द्रोही यह बता सकते हैं कि यदि राणा सांगा ने बाबर को आमंत्रित किया था तो आखिर उन दोनों के बीच भीषण युद्ध क्यों हुआ था। जिस बाबर की सेना ने इब्राहिम लोधी को हराया उसी की सेना को पूर्वी राजस्थान के बयाना में राजपूतों की सेना से करारी हार का सामना करना पड़ा था।
हां, उनकी एक चूक यह अवश्य थी कि उन्होंने भी, हिंदू स्वभाव के अनुसार, पृथ्वीराज चौहान की तरह, बाबर को हराने के बाद जीवित छोड़ दिया जो कि देश के लिए एक दंश बन गया।
काश इन नमाजवादियों ने कभी यह भी पढ़ा होता कि राणा सांगा के ही वंशज महाराणा प्रताप तो जंगल में घास की रोटियां खाकर मुगलों से लड़े थे।
गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की तीन पीढ़ियों का बलिदान औरेगंजेब के क्रूर शासन के कारण ही हुआ था।
जो नमाजवादी मानसिकता के साथ चलते हैं और नाम समाजवादी रखते हैं, ऐसे छुपे हुए भेड़ियों को बिना देरी सदन से बाहर निकालना चाहिए।

(लेखक विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं )

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