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उपन्यास ’ये देश हमारा है’ में लेखक ने वर्तमान में, वैश्विक संकट के रूप में आतंकवाद विषय को लक्ष्य करके विस्तारित किया है : केवल प्रसाद

एक पाठकीय प्रतिक्रिया

पुस्तक का नाम- ये देश हमारा है
(बाल उपन्यास)
उपन्यासकार- संजीव जायसवाल ’संजय’
संपर्क- मोबाइल नं.- 73182 13943
पुस्तक का मूल्य- ₹ 199.00 पेपर बैक (पृष्ठ संख्या- 118)
प्रकाशन- फ्लाई ड्रीम्स पब्लिकेशंस, जैसलमेर, राजस्थान

संजीव जायसवाल ’संजय’ एक नामचीन साहित्यकार हैं। आप केवल बाल साहित्य ही नहीं बल्कि किशोर, प्रौढ़ आदि सभी के लिए उत्कृष्ट लेखन का कार्य निरंतर करते रहे हैं। जिसके लिए समय–समय पर भारत सरकार द्वारा आपको अच्छे लेखन के लिए सम्मानित भी किया जाता रहा है। इतना ही नहीं आपकी कहानियों, उपन्यासों का देश के विभिन्न राज्यों की भाषाओं में अनुवाद करके उन्हें विद्यालयों में पढ़ाया भी जा रहा है। ’वह हँस दिया’ चित्र कथा संग्रह को हिन्दी भाषा के अतिरिक्त अंग्रेजी सहित विश्व की 149 भाषाओं में अनूदित करके प्रकाशित की गई है। हम भारतीयों को ऐसे उत्कृष्ट लेखन और श्रेष्ठ साहित्यकार संजीव जायसवाल ’संजय’ की आदर्शपूर्ण साहित्यिक सेवाओं के लिये उन पर गर्व है।

प्रस्तुत उपन्यास ’ये देश हमारा है’ में आपने वर्तमान में, वैश्विक संकट के रूप में आतंकवाद विषय को लक्ष्य करके प्रासंगिक कथावृत्त को बहुत ही रोचक, साहसिक और सद्भावना से ओत–प्रोत रोमांचक चित्रों के साथ विस्तारित किया है–

” कर्नल भवानी सिंह ने सभी बच्चों को एक–दूसरे से परिचय कराया। नये दोस्त पाकर बच्चे बहुत प्रसन्न हुए। उन बच्चों का उत्साह और उल्लास देखते ही बनता था।
तभी कर्नल सिंह ने बताया कि ”बच्चों आगे का रास्ता बहुत खतरनाक है। इसलिए अब हम लोग जमीनी रास्ते से नहीं जायेंगे..। तो फिर! कई स्वर एक साथ गूंजे।” पृष्ठ संख्या 11–12

एक बात सत्य है कि पहले भारत में लोक कथाओं और पौराणिक कथाओं को ही बच्चों का साहित्य माना जाता था। लेकिन जब से विज्ञान, कम्प्यूटर, पर्यावरण और प्रगतिशील समाज ने प्रकृति को प्रभावित किया है, तब से हम सब इस पृथ्वी को भविष्य में आने वाले संकट से बचाने की युक्ति सोचने में चिंतित हो गए हैं। अब हमें परियों की कहानी, राजा–रानी और भूत–प्रेतों के किस्से अच्छे नहीं लगते हैं। बल्कि अब हमें कंप्यूटर, रोबोट, रॉकेट, उपग्रह, पृथ्वी पर अपने देश की सीमाओं के विषयों पर अधिक से अधिक जान लेने और इसकी रक्षा करने की इच्छा होती है। जैसे ही कैप्टन, हेलीकॉप्टर के चालक ने बताया कि–

”हमारे हेलीकॉप्टर का इंजन खराब हो गया है। इसे फौरन नीचे उतारना होगा। लेकिन घने जंगल के बीच कोई समतल जमीन नहीं दिखाई दे रही है….। लहराता हुआ हेलिकॉप्टर जब जमीन से चंद फुट की दूरी पर रह गया तो बच्चों ने अपनी आँखें बंद कर ली।”

लेखक ने बड़ी ही सूझ–बूझ से कैप्टन द्वारा हेलीकॉप्टर उतारते हुए उसके पंख को पेड़ की डाली से टकरा देता है। सब एक–दूसरे के ऊपर गिर जाते हैं, लेकिन बच्चे लेखक से ज्यादा समझदार निकले–

”अगले पल सभी बच्चे हेलिकॉप्टर से बाहर निकल कर तेजी से सुदूर भाग लिए। 50 मीटर की दूरी तक पहुंचते ही हेलीकॉप्टर, एक ज़ोरदार धमाके के साथ धूं–धूं करके जलने लगा।”

इस उपन्यास में सिंधबाद की कहानियां, साहसिक समुद्री यात्राएँ और जेम्स बॉन्ड जैसी कहानियों की झलक मिलती है। जो बाल मन में तीव्र उत्सुकता वश उन्हें आगे आने वाले संकटों के प्रति सचेत रखती है। यह भावना ही उपन्यास में बालकों/किशोरों को सत्य, अहिंसा और देश प्रेम के प्रति आदर्शपूर्ण जज़्बा, साहस और सत्यनिष्ठा के साथ देश प्रेम की भावना को जाग्रत करने जिजीविषा पैदा करती है।

इस उपन्यास में कथानक, पात्र एवं चरित्र चित्रण, पात्रों के मध्य आपसी संवाद, देशकाल और वातावरण, भाषा–शैली विषयानुसार सटीक, यथार्थ और विश्वसनीय है। भाषा सुबोध, प्रांजल और सम्प्रेषणीय है। शीर्षक की सार्थकता में आज का विश्वव्यापी क्रूर आतंकवाद इसकी सफलता का खुद एक जीता जागता उदाहरण है–

“हिन्दुस्तानी कुत्ते, तू इन जंगलों में क्या कर रहा है? एक वर्दीधारी ने अपने रायफल की नाल कैप्टन वर्मा(हेलीकॉप्टर चालक) के सीने से सटाते हुए पूछा…..। उन पाँचों वर्दीधारियों को देखते ही कैप्टन वर्मा पहचान गए थे कि ये सब दुश्मन राष्ट्र के सैनिक हैं।” पृष्ठ संख्या ४६

यह भी सच है कि जब हम किसी संकट में फ़ँसते हैं तो हमारे लिए कोई अदृश्यशक्ति संकटमोचक बन कर प्रकट होती है। ऐसी ही स्थिति में लेखक ने जंगली समुदाय के कबायली लोगों के माध्यम से दुश्मन राष्ट्र के सैनिकों का सिर्फ भेद ही उजागर नहीं कराता है बल्कि उन्हीं के सहयोग से आतंकवाद जैसे विकट संकट से मोक्ष भी दिला देता है।

वास्तव में, उपन्यास की भाव–भूमि राष्ट्र प्रेम से है। अतः लेखक द्वारा बड़ी बुद्धिमत्ता पूर्ण सकारात्मकता सोच के तर्क पर कथा में जो चित्र खींचे हैं, वे पाठक के रोमांच को चरमोत्कर्ष तक बढ़ा जाते हैं। क्योंकि लेखक के पात्र अंततः अपनी बुद्धि कौशल और देश के प्रति जान देने की उत्कंठा उनके अतुलित साहस एवं शक्ति के माध्यम से लक्ष्य/ उद्देश्य में सफलता प्राप्त करने को समर्थ बना देता है।

ऐसे देश प्रेम, लोक कल्याणकारी और समाजोत्थान जैसे विषयों पर रची जाने वाली पुस्तकें बच्चों में हिंसक प्रवृत्तियों को रोकने, सद्भावना और सहकार की भावना को प्रचारित–प्रसारित करने का सोद्देश्यपूर्ण कार्य करतीं हैं। जिसके लिए लेखक साधुवाद के पात्र होते है।

इस उपन्यास की पूरी कहानी का मज़ा लेने के लिए आप इसकी प्रति को प्रकाशक से खरीद कर प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं आप इसकी प्रतियां बच्चों/किशोरों के जन्मदिन पर उन्हें भेंट करके भी अतिशय आनंद की अनुभूति से लबालब हो सकते हैं। निश्चित रूप से यह उपन्यास जिज्ञासुओं के लिए पठनीय, संप्रेषणीय और उनके साहस को बढ़ाने वाला है। इसी आशा विश्वास के साथ लेखक संजीव जायसवाल ’संजय’ जी को यह सुन्दर उपन्यास रचे जाने के लिए हार्दिक शुभकामनाएं और ढेरों बधाइयां।

समीक्षक

केवल प्रसाद सत्यम

स्थापक अध्यक्ष

मो. 94155 41353

सत्यम साहित्य संस्थान, उ. प्र. लखनऊ

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