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राजनैतिक छल प्रपंच पर भी लगे विराम

विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता विहिप
इमामों को वेतन देने का उनका दाव जब ठीक से कारगर नहीं हुआ तो अब हिंदू पंडितों और ग्रंथियां को फांसने के लिए जाल बिछा दिया!! जिनकी 10 साल पहले घोषणा की, उनको डेढ़ साल से कुछ नहीं मिला और जिनकी 10 वर्ष बाद घोषणा हुई उनके 10 साल के एरिया का क्या? उसकी कोई चर्चा नहीं। आखिर क्यों?
दिखावा ऐसे, जैसे कि अपनी जेब से दे रहे हों जबकि, सच्चाई यह है कि जनता की खून पसीने की कमाई को अपने राजनीतिक दिवास्वप्न के लिए लुटाया जा रहा है! राजधानी के इन राजनेताओं और राजनीतिक दल द्वारा फैलाए जा रहे इस धोखे, लालच और छल-प्रपंच पर चुनाव आयोग को भी संज्ञान लेना चाहिए।



