शिक्षा ऋषि जगदीश गांधी मरकर भी अमर रहेंगे.
डॉ.जगदीश गांधी के साथ बीते पलों की अनमोल यादें ...

एड. के सरन
दुनियां भर में एक ही शहर में सर्वाधिक क्षेत्रों की संख्या होने का विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले स्कूल सी0एम०एस० लखनऊ के संस्थापक, छात्र जीवन से मुझे भाई समान मित्र मानने वाले, जगदीश गांधी का कल 22 जनवरी को लखनऊ में निधन हो गया।
वह मूलरूप से सिकन्दराराऊ (अलीगढ़) के एक छोटे से मकान में रहते थे उनके पिता पटवारी के पद पर कार्यरत थे।इन्होंने जिला स्तर पर छात्र नेता के रूप में पहचान बनाई फिर आगे की शिक्षा (बी0काॅम) के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय आ गये ।यहां वह 1959 में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। आदर्श शिक्षा केन्द्र नाम से अमीनाबाद पावर हाऊस के पीछे सायंकालीन कोचिंग कालेज खोला। वह लखनऊ से साईकिल चुनाव चिन्ह से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में, लोक सभा का चुनाव भी लड़े थे। तब प॔.आनन्द नारायण मुल्ला एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट यहां से निर्दलीय जीते थे।इस चुनाव में मैं शुरू से आखीर तक जगदीश गांधी जी के साथ रहा था।

वह सिकन्दराराऊ से एमएलए का चुनाव(निर्दलीय) लड़े तब भी मैं उनके साथ था। वह जीते और विधायक बन कर कांग्रेस में शामिल हुए। अगली बार कांग्रेस का टिकट नहीं मिला तो राजनीति से सन्यास लेकर पूरी तरह स्कूल को बढाने में जुट गए।
1961 में अपनी पत्नी श्रीमती भारती गांधी के साथ स्टेशन रोड पर एक किराये कै मकान में पांच क्षात्रों को लेकर एक स्कूल खोला था,”सिटी मोंटेसरी स्कूल” जो उनके शिक्षा के प्रति रात दिन समर्पण के कारण कुछ ही वर्षों में सैकड़ो क्षात्रों वाला मशहूर स्कूल बन गया।
अपनी दूरदर्शिता थी कि उन्होनें अपने स्कूल के शिक्षा स्तर और नाम का प्रदर्शन करने के लिए, लखनऊ में प्रति वर्ष शोभा यात्रा निकाली शुरू की। ट्रक,बस,बैलगाड़ी रिक्शों पर सजी बच्चों की झांकियो के साथ यह शोभा यात्रा रवीन्द्रालय चारबाग से शुरू होकर नाका,अमीनाबाद,कैसरबाग होते हुए स्टेडियम तक जाती थी। धीरे-धीरे अपने बैनर के साथ कुछ और स्कूलों को भी जोड़ा और सेन्ट्रल स्पोर्ट्स स्टेडियम में स्कूलों के बीच सांस्कृतिक प्रतियोगिता शुरू कराई। 1970 के दसक में सिंगल फेयर ड़बल जर्नी की भारतीय रेलवे की, स्कूली क्षात्रों की, टूर फार भारत दर्शन की योजना का लाभ दिला कर विभिन्न राज्यों के स्कूली बालक तथा युवाओं को लखनऊ दर्शन के लिए आमंत्रित करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों को और स्कूलों को पत्र भेजे।

योजना रंग लाई और लखनऊ में सीएमएस द्वारा आयोजित “अखिल भारतीय बाल एवं युवक समारोह में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों के तमाम जिलों के स्कूलों से बच्चे युवा अपने अध्यापकों के साथ आने लगे। राज्यों ने न केवल बच्चों को भेजा बल्कि अपने राज्य के सांस्कृतिक विभाग से वित्तीय सहायता भी भेजी। कालान्तर में यह समारोह 24 से 27 दिसम्बर तक लखनऊ के स्पोर्ट्स स्टेडियम में चलने वाले अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता मे परिवर्तित हो गया। इसमें केन्द्र सरकार के तत्कालीन रक्षा मंत्री वी.के. कृष्णा मेनन जैसे नेता और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्य मंत्री प॔. कमला पति त्रिपाठी , हेमवती नन्दन बहुगुणा आदि समरोह के उद्घाटन के लिए आने लगे।
जगदीश गांधी जी से मेरी पहली मुलाकात 1964 में विद्यांत कालेज में इन्टर कालेजैज डिबेट कम्पटीशन में हुई थी। यह कम्पटीशन विद्यांत कालेज द्वारा अपनी सिल्वर जुबली समारोह के अवसर पर आयोजित किया गया था। जिसमें योगेश प्रवीन जी के पिता जी बाबू गणेश प्रसाद जी (हिन्दी के टीचर) के प्रिय शिष्य होने के नाते उन्होने विद्यांत कालेज के हाईस्कूल क्लासेज वर्ग से मुझे उतारा था।इस कम्पटीशन में लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्कालीन हेड प्रोफेसर सूद और विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष जगदीश गांधी आए थे। प्रतियोगिता में मेरा उद्बोधन सुनने और मेरे जीतने के बाद पुरस्कार देते समय जगदीश गांधी जी ने मुझसे स्नेह से कहा -तुम तो बहुत अच्छा बोलते हो कभी स्टेशन रोड आकर मुझसे मिलो।

मैं 1966-67 में जब उनसे मिला तो उन्होने बाल मेला में मुझे भी जोड़ा। एक उत्साही युवा की तरह मैंने कई साल सहयोग किया तो उन्होने मुझे 1970 में अखिल भारतीय बाल युवक समारोह का महामंत्री बना कर समारोह की शोभायात्रा के दौरान एक गाड़ी पर खड़े होकर रनिंग कमेन्ट्री करने का अवसर दिया।फिर तो स्टेडियम में 24 से 27 दिसम्बर तक होने वाले कार्यक्रमों मे कालेजों और विश्वविद्यालय के छा त्रों को इस समारोह मे स्टेडियम में रात को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता का आंखों देखा हाल बताने का जिम्मा भी मुझे मिला।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के बहुत से छात्र कार्यक्रम देखने आते थे। उन्हे पास देकर बुलाने और स॔गठित रूप से जोडने का मुझे अवसर मिल गया ।1970 से 1972 के बीच -छात्रों में पहचान बनाने और नाम कमाने तथा भरपूर सम्मान पाने के अनेक अवसर इस समारोह के कारण मिलने लगे। इसी समारोह से अर्जित लोकप्रियता के चलते मैं एल एल,बी. का छात्र होने के नाते विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी में महामंत्री का चुनाव लड़ा और पिछले 18 सालों का रिकॉर्ड तोड़कर भारी बहुमत से जीता। फिर मैंने युवक समारोह की लखनऊ की सड़कों पर निकलने वाली अभूतपूर्व विशाल शोभायात्रा जिसमें देश के हजारों छात्र, युवा भाग लेते थे और अपने अपने राज्यों के परिधानों में सामूहिक नृत्य उसी कला कौशल से करते थे जैसे गणतंत्र दिवस की परेड में होता है। लोग चारबाग से स्टेडियम तक सड़क के किनारे खडे होकर पंजाब का भाखड़ा, आसाम की बिहू और भिन्न-भिन्न राज्य के अनेक प्रकार के नृत्य करते बालक बालिकाओं,युवक युवतियों को देखकर मुग्ध होकर जाते थे। इस यात्रा का नेतृत्व लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष द्वारा विश्वविद्यालय का ध्वज लेकर, लखनऊ के तमाम कालेजों के अध्यक्ष और छात्र नेताओं सहित किया जाता था।1972 के समारोह के समय यह सुझाव मैने श्री गांधी को दिया था जिसे उन्होने फौरन स्वीकार कर लिया था।

इस समारोह और सीएमएस की शिक्षा प्रणाली तथा रिजल्ट से लखनऊ नगर के अभिभावक और जनता के लोग इतने खुश होते थे कि वे भी अपने बच्चों का एडमिशन सीएमएस में कराने लगे जिसका परिणाम यह हुआ कि लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में सीएमएस
की ब्रांचेज खुलने लगीं। अब 50 000 के आस पास बच्चे लखनऊ की समस्त शाखाओं में पढ़ रहे हैं।
मेरे बेटे-बेटी नाती-पोता-नातिन सब सीएमएस में ही पढे। मेरी पत्नी स्टेशन रोड हेड ऑफिस ब्रांच में काफी वर्षों तक टीचर और मिसेज भारती गांधी की सर्वप्रिय टीचर रहीं। बाद में 1984 में उन्होंने सीएमएस से सेमी फाइनल देकर अपना स्कूल खोल लिया। पर हम लोगों के संबंध गांधी जी और भारती जी से वैसे ही रहे।
विगत 9 दिसम्बर 2023 को सीएमएस एलडीए कानपुर रोड ब्रांच में आयोजित विक्रम _साराभाई #स्पेस _एक्जीबिशन जिसमें ,क्रमश: XI तथा VIII में पढ रहे नाती तथा पोते को स्कूल की ओर से Guardians को अटेंड करने की व्यवस्था में मुख्य रूप से जिम्मेदारी पर लगाया गया था, उन्हें प्रोत्साहित करने तथा अन्तरिक्ष प्रदर्शनी देखने गया तो इत्तफाक से जगदीश गांधी जी और भारती गांधी जी भी उस समय प्रदर्शनी में मौजूद थे। गांधी जी उस समय कहीं जाने के लिए गाड़ी में बैठने जा रहे थे तभी मुझे देखकर रूक गये और फिर काफी देर तक उस जमाने की बातें होने लगी, जब हम लोग रात-रात भर जागकर 12, स्टेशन रोड स्थित उनके ईंटे वाली फर्श पर बिछे गद्दों और चादर पर बैठ कर डेस्क पर कागज रखकर समारोह की तैयारी के संबंध में लिखा पढ़ी करते थे। आज ईंट के फर्श की जगह लखनऊ के विभिन्न क्षेत्रों में उनके श्रम और लगन से खड़े किये गए महलों से बड़े भवनों के पीछे, उनकी रात दिन की मेहनत है। जीवन का एक भी क्षण व्यर्थ की बातों में गंवाए बिना, सिर्फ और सिर्फ अपने स्कूलों शिक्षकों तथा बच्चों के बारे में सोंचने के कारण ही 62 साल में वह स्कूलों का विशाल साम्राज्य लखनऊ के वर्तमान और आगे आने वाली पीढी के छात्रों का जीवन सफल बनाने के लिए खड़ा कर गये हैं।
आखिर में एक विशेष घटना बता कर बात खत्म करूंगा कि 1968-69 में युवक समारोह के दिनों में 12,स्टेशन रोड स्थित उनके घर/कार्यालय में काम करते-करते काफी रात हो गई और वह अपने लकड़ी के बने तखत पर सोने जाने लगे तो एक पैड और कलम तकिया के नीचे रखने लगे. मैंने कहा-भाई साहब ,3 बज चुके हैं क्या हम लोगो के जाने के बाद फिर कुछ लिखेंगे क्या?
उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया — सरन तुम नही जानते ये मेरी आदत है रोज रात को कागज पैड और पेन इसलिए रखकर सोता हूं कि नींद आने पर भी अगर कोई ख्याल सोते-सोते आ जाए और लाइट चली जाए तो कम से कम अंधेरे में पेन से कागज पर उस विचार के बारे में दो चार शब्द लिख दूं ताकि सुबह देखने पर टेढे मेरे अक्षरों को देखकर पूरा आइडिया याद आ जाए वर्ना रात का सोंच सुबह अपना नहीं सपना हो जाता था।
लखनऊ के हजारों-हजार छात्र सीएमएस में पढकर दुनियाभर में बड़े बड़े पदो पर बैठे हैं जो विश्व प्रसिद्ध जगदीश गांधी जैसे महान शिक्षाविद की देन है।अपने खून-पसीने और अद्भुत अद्वितीय कर्म से उपजा कर, इस शिक्षा ऋषि ने शिक्षा क्षेत्र में दुनियां को जो उपहार दिया है, उसने उन्हें शिक्षा जगत के इतिहास में सदा सर्वदा के लिए अमर उन्हें अमर बना दिया है।
अपने लखनऊ विश्वविद्यालय के भूतपूर्व छात्र नेता , वकील और पद्मश्री डा.योगेश प्रवीन परिवार के आठ हजार सदस्यों की ओर से शिक्षा- ऋषि ब्रह्मलीन जगदीश गांधी जी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
शत शत नमन।
गांधी कभी मरते नहीं वह लोगों के दिलों में जिन्दा रहते हैं।



