भयावह स्थिति में पहुंचे प्रदूषण को जनहित में तत्काल नियंत्रित किया जाये : डा. गिरीश

लखनऊ : हम समझते हैं कि अपने कार्यक्रमों में अत्यंत व्यस्त होने के बावजूद आप इस तथ्य से अवगत होंगे कि इन दिनों दिल्ली- एनसीआर एवं राजधानी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वायु प्रदूषण अत्यधिक बढ़ गया है। आज के आंकड़े और बड़े हो सकते हैं पर कल रविवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता अत्यन्त गंभीर श्रेणी में पहुँच गई थी। यहाँ की हवा में सामान्य से पाँच गुना प्रदूषण कण व्याप्त हो चुके हैं। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 एक्यूआई से अधिक रहा। एनसीआर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भी यही हाल है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हालात भी बेहद खराब हैं। लखनऊ का औसत एक्यूआई कल 274 रहा जो शनिवार की अपेक्षा 40 माइक्रोग्राम अधिक है।
इस कोहरानुमा हौग से फसलें ही नहीं नागरिक जीवन पर भी व्यापक प्रभाव दिख रहा है। सर्वाधिक पीड़ित बुजुर्ग और बच्चे हैं। श्वान्स, दमा और दिल के मरीजों को अधिकाधिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। नवजात और नव प्रसूताओं को भी जोखिम उठाने पड़ रहे हैं।
मानवजनित इस प्रदूषण को प्रकृति में बदलाव से संरक्षण मिल रहा है। धनाढ्य लोग चेतना के अभाव और अपने वैभव के घमंड में चूर होकर प्रदूषण को और भी बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर क्रिकेट मैच जीतते ही पटाखों के दागने की बाढ़ सी आजाती है। छोटे मोटे त्यौहार जिनका पहले सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं होता था मध्यवर्ग ने पटाखे फोड़ने के अवसर में बदल दिया है। ऐसे अनेक उदाहरण यहां दिये जा सकते हैं। अब पाँच दिनी दीपावली- उत्सव शुरू होने जा रहे हैं और प्रदूषण में भारी व्रद्धि होने वाली है। इसकी कीमत वृद्धों, बच्चों, बीमारों ही नहीं उन सबको भी चुकानी है जो पर्यावरण को दूषित करेंगे। हम अपने लिए खुद ही खाई खोद रहे हैं।
इस पर नियंत्रण के सरकारी प्रयास जरूरी हैं। आखिर सरकार होती भी इसीके लिए है कि जब अन्य प्रयास विफल हो जाएँ तो सरकारें आगे आयें। अच्छी बात है कि दिल्ली में कुछ कदम उठाए गए हैं। आगे और भी कदम उठाए जाने की जरूरत है। चन्द वोटों के लालच में इस मानवीय खतरे की अनदेखी नहीं की जा सकती है।
अतएव आपसे जागरूक नागरिकों की अपील है कि पटाखों पर रोक लगायेँ। सड़कों पर धुआँ फेंकते दौड़ रहे कंडम वाहनों की धर- पकड़ की जाये। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने को इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने सहित अन्य कदम उठाए जायें। अन्य वैज्ञानिक उपाय भी हैं जिनसे आप और आपके संबन्धित मंत्रालय भलीभाँति परिचित हैं। परंतु पाँच राज्यों के चुनावों और आगामी लोकसभा के चुनावों की तैयारियों में व्यस्त होने के कारण संभवतः इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
एक निवेदन और। सरकार के कतिपय हिस्से और मीडिया, प्रदूषण का जिम्मा किसानों पर डालता रहता है। कृपया ये रोका जाये।
अनेक नागरिकों ने मुझसे आग्रह किया कि उनकी इस पीड़ा को सार्वजनिक साधनों से आप तक पहुंचाऊं। अतएव यह अपील जारी कर रहा हूँ। उम्मीद है कि राहतकारी कदम जल्द देखने को मिलेंगे।



