विभाजन पैदा करने को मुख्यमंत्री ने ज्ञान वापी पर दिया असंवैधानिक बयान : भाकपा
जनता से सावधान रहने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने की भाकपा की अपील

लखनऊ : न्यायालय के निर्णय को प्रभावित करने और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा॰ गिरीश ने कहा कि हर मोर्चे पर विफल होने और पैरों तले जमीन खिसक जाने से भाजपा इस कदर बौखला गयी है कि वोट की खातिर घ्रणा, विद्वेष और विभाजन की राजनीति को खुल कर हवा दे रही है। न तो वह संविधान को मानती है और न ही न्यायालय की परवाह करती है। भाजपा के शीर्ष नेत्रत्व में एक से एक कट्टर बयान देने की होड लगी है। उनके इन क्रिया कलापों से देश की एकता और भाईचारा दांव पर लगा है लेकिन उन्हें इसकी कोई फिक्र नहीं।
कल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ के ज्ञानवापी संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुये डा॰ गिरीश ने कहा कि मामला न्यायालय में विचारधीन होने के बावजूद संवैधानिक पद पर बैठे श्री योगी ने ऐसा बयान दिया जिसकी देश ही नहीं विदेशों तक में निंदा हो रही है। क्या ये अदालत के निर्णय को प्रभावित करने की कोशिश नहीं? क्या यह अल्पसंख्यकों को भयभीत करने की कोशिश नहीं? क्या ये भाजपा में एक से बढ़ कर एक कततारपंथी जताने की होड का परिणाम नहीं, डा॰ गिरीश ने सवाल किया है।
उन्होने आरोप लगाया कि विभाजन के लिए विषाक्त वातावरण बनाने को डबल इंजिन सरकार ने मणिपुर में मेतेयी लोगों को आदिवासियों की जमीन दिलवाने के नाम पर अपने लोगों से अदालत में केस डलवा दिया। इसी तरह ज्ञानवापी या मथुरा में अदालत में गए लोग कोई और नहीं सरकार के अपने बंदे हैं। हिंदुओं के नाम पर अदालत जाने वाले इन लोगों के बारे में कोई बताएगा कि कब हिन्दू समाज ने इन्हें अपना नुमाइंदा चुना है? जब चुना ही नहीं तो कैसे ये हिन्दू पक्ष हो गए?
डा॰ गिरीश ने कहा कि आज भाजपा ने इतना सांप्रदायिक ज्वलनशील पदार्थ देश में फैला दिया है कि जहां माचिस की तीली गिरती है वहीं आग भड़क उठती है। मणिपुर अभी तक जल रहा है, कश्मीर इनसे सँभल नहीं रहा। कल हरियाणा के नूंह में जो हुआ वो भी भाजपा द्वारा फैलाये गए सांप्रदायिक जहर का परिणाम है। इनके द्वारा फैलाये गये विष का ही परिणाम है कि जयपुर बंबई ट्रेन में चार लोगों की हत्या करने वाले जवान ने कहा कि “ये लोग पाकिस्तान से आपरेट होते हैं, इसलिए उन्हें मारा। भारत में यदि रहना है तो केवल मोदी योगी कहना है।“ जाहिर ऐसा जहर तमाम लोगों के मस्तिष्क में ठूंस दिया गया है, जिनमें सुरक्षाबल भी शामिल हैं।
देश के लिए यह वातावरण कितना घातक है यह जनता को समझना होगा।
उन्होने कहा यूपी में स्वच्छ चुनावों की डींग हाँकते वक्त योगीजी भूल गये कि जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख चुनाव में भाजपा और उसकी सरकार ने कैसा नंगा नाच किया था और सपा की एक अध्यक्ष पद प्रत्याशी महिला का सरेआम चीरहरण हुआ था। विपक्ष पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुये वे भूल गए कि आज राजनीति में मौजूद सारे भ्रष्ट भाजपा में प्रवेश पा चुके हैं। ज्ञानवापी को मुस्लिम समाज से मुक्त कराने को धमकी देने वाले योगीजी शायद यह भूले नहीं होंगे कि जिस गोरक्षपीठ के वे अधीश्वर हैं उस पर कभी पिछड़ी जातियों का आधिपत्य था और आज जिस जाति के कब्जे में है, किसी से छिपा नहीं है।
संवैधानिक पद पर विराजमान योगीजी को इतना तो मालूम ही होगा कि संसद द्वारा 1991 में पारित कानून के अनुसार किसी भी धर्मस्थल की वही स्थिति रहनी है जो 15 अगस्त 1950 को थी। फिर ऐसे बयानों का एक ही मतलब है कि भाजपा और उसके शीर्षस्थ नेता संविधान और न्यायालय की उसी हद तक परवाह करते हैं जिस हद तक उनसे उनके स्वार्थ सिध्द होते हैं। शेष मामलों में वे ठेंगा दिखाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय को इसका संज्ञान लेना चाहिए।



