नाखून में समस्याएं होना लीवर की बीमारियों के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं:डॉ. गौरव कुमार सिंह

कानपुर: लीवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। लीवर का काम खून को डिटॉक्स करने और कई महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाना होता है। जब लीवर ठीक से काम नहीं कर रहा होता है, तो इससे नाखूनों में कई बदलाव आते हैं और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। रीजेंसी हेल्थ, कानपुर के डॉक्टरों का कहना है कि नाखूनों में असामान्यताएं कभी-कभी लीवर की बीमारियों के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इसलिए नाखूनो में कोई भी समस्या दिखने पर उसे गंभीरता से लेना चाहिए।
लीवर की बीमारी जब होती है तो अधिकांश लक्षण एडवांस स्टेज में नज़र आते हैं लेकिन तब तक स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लीवर की बीमारी में एक सामान्य लक्षण नाखूनों में बदलाव होना है। जब नाखूनों में आये इन बदलावों का कोई ठोस कारण न ज्ञात हो तो वह लीवर की बीमारी का संकेत हो सकता है। सोहाग यूनिवर्सिटी में डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट के रिसर्च का दावा है कि यह कम इम्युनिटी, आयरन की कमी, एनीमिया या वृद्धावस्था के कारण हो सकता है। चिकित्सकों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है की लीवर की बीमारी के मरीजों के शीघ्र डायग्नोसिस के लिए नाखूनों के रंग, बनावट, मोटाई और गोलाई को ध्यान से समझें और जांच करें।
रीजेंसी हेल्थ, कानपुर के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ गौरव कुमार सिंह ने इस बारे में बताते हुए कहा, “नेल क्लबिंग एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें उंगलियों के सिरे बड़े हो जाते हैं और नाखून उंगलियों के चारों ओर मुड़ जाते हैं। यह कई अलग-अलग प्रकार के लीवर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जैसे कि सिरोसिस और बिलियरी एट्रेसिया आदि। टेरी नाखून एक ऐसी बीमारी होती है जिसमे नाखून सफेद या हल्के गुलाबी हो जाते हैं और नाखूनों के सिरे लाल या भूरे रंग के दिखाई देने लगते हैं। यह अक्सर लीवर सिरोसिस वाले लोगों में देखा जाता है। ब्यू की रेखाएँ एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें नाख़ून में क्षैतिज रेखाएँ दिखाई देती हैं। ये लीवर की बीमारी सहित कई अलग-अलग बीमारियों का भी संकेत हो सकती है। ऐसी नाखून असामान्यताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि सभी नाखून में बदलाव लीवर की बीमारी का संकेत नहीं होता है। अगर आप अपने नाखूनों में कोई बदलाव देखते हैं, खासकर अगर वे पीलिया या पेट दर्द जैसे अन्य लक्षणों के साथ नज़र आते हैं, तो आगे की जांच के लिए किसी डॉक्टर को जरूर दिखाएं।”
लीवर की बीमारी का डायग्नोसिस आमतौर पर मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, खून की जांच, इमेजिंग टेस्ट और कभी-कभी लीवर बायोप्सी से किया जाता है।
डॉ. गौरव कुमार सिंह के अनुसार लीवर की बीमारियों के लक्षण नीचे दिए गए हैं
– त्वचा और आंखों का सफेद होना (पीलिया)
– खून की उल्टी होना
– त्वचा में खुजली होना
– गहरे रंग का पेशाब और टार की तरह दिखने वाला स्टूल
– आसानी से खून बहना या चोट लगना
– तरल पदार्थ के बनने से पैर का सूजना (एडिमा) या पेट (अस्किट्स)।
– सेक्स ड्राइव में कमी
चूँकि सिरोसिस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों और किसी भी गंभीरता को मैनेज किया जा सकता है या इसकी प्रगति को धीमा किया जा सकता है। सिरोसिस के मरीजों को शराब या धूम्रपान का सेवन बंद कर देना चाहिए। डॉक्टर ऐसे मरीजों को ऐसे खाद्य पदार्थ खाने की सलाह देते हैं जो स्वस्थ हों, जिसमे सोडियम कम होता हो आदि खाने चाहिए। इसके अलावा किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचना चाहिए या ओवर-द-काउंटर दवाओं का सावधानी से उपयोग करना चाहिए।



