ग्रामीण क्षेत्र में पंचकर्मा ट्रेनिंग द्वारा रोज़गार बढ़ाने के लिए किये समझौते पर हस्ताक्षर
आयुष मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय की भागीदारी

नयी दिल्ली : केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंदा सोनोवाल और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह की उपस्थिति में दोनों मंत्रालयों ने ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोज़गार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किये।
ट्रांसपोर्ट भवन स्थित आयुष मंत्रालय में होने वाले इस कार्यक्रम में समझौते पर डॉ. मनोज नेसरी, सलाहकार, आयुष मंत्रालय और कर्मा जिम्पा भूटिया, संयुक्त सचिव, ग्रामीण कौशल ने हस्ताक्षर किये।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री, डॉ मुंजापारा महेन्द्रभाई कालूभाई, सचिव आयुष वैद्य राजेश कोटेचा, विशेष सचिव प्रमोद कुमार पाठक, शैलेश कुमार सिंह, सचिव, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, प्रोफेसर तनूजा मनोज नेसरी, डायरेक्टर आयुष सब -स्किल कौंसिल भी इस उपलक्ष्य पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंदा सोनोवाल ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरी राज सिंह का स्वागत करते हुए कहा दोनों मंत्रालयों द्वारा किया गया यह समझौता जिसमें ग्रामीण तबके के लोगों को आयुर्वेद के पंचकर्मा से जुड़ी ट्रेनिंग करा कर उनका कौशल विकास किया जाएगा जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को गाँव में रोज़गार मिल सकें और स्वरोज़गार की भी संभावनाएं भी बढ़ सकें।
इस अवसर पर आयुष मंत्री सर्बानंदा सोनोवाल ने ग्रामीण विकास मंत्री गिरी राज सिंह का स्वागत किया और कहा कि दोनों मंत्रालय आपस में मिलकर ग्रामीण क्षेत्र में रोज़गार और स्वरोज़गार को बढावा देने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में लाखों महिलाएं और युवजन दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना के अंतर्गत आयुष मंत्रालय के सहयोग से की पंचकर्मा से जुडी ट्रेनिंग लेंगे और इस क्षेत्र में स्वरोज़गार की तरफ अग्रसर होंगे।
उन्होंने अपने udbodhan आगे कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में तीन बिलियन डॉलर की आयुष इंडस्ट्री अब 19 बिलियन डॉलर की हो गयी हैं और इसमें सर्बानंदा सोनोवाल के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय का एक बड़ा हाथ रहा हैं।
इस अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशिका प्रोफेसर (डॉ) तनूजा मनोज नेसरी ने कहा कि आयुष मंत्रालय के सहयोग से दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना स्वरोज़गार के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी।
इसके अंतर्गत ग्रामीणों को निम्नांकित ट्रेनिंग दी जाएगी :
– पंचकर्मा तकनीशियन
– पंचकर्मा असिस्टेंट
– आयुर्वेदिक माससेउर (मालिश)
– क्षरा कर्मा तकनीशियन
– कुप्पिंग थेरेपी असिस्टेंट
इस समझौते का उद्देश्य आयुष क्षेत्र में ग्रामीण कौशल को विश्वस्तरीय बनाना हैं और विश्वस्तर पर आयुर्वेद के क्षेत्र में रोज़गार की बढ़ती मांग की पूर्ती करना हैं।


