राहुल गांधी संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं: शाहनवाज़ आलम
विपक्षी दलों को भी राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होना चाहिए

स्पीक अप # 73 में बोले कांग्रेस नेता
इंदौर : संघ और भाजपा संविधान को अपने लक्ष्य में सबसे बड़ी बाधा मानते हैं. इसीलिए सत्ता में आने के बाद हर सरकारी विभाग यहाँ तक कि न्यायपालिका में भी ऐसे लोगों को लाया गया जो संविधान को कमज़ोर कर सकें. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार भी संविधान समीक्षा के नाम पर संविधान में दलितों और कमज़ोर तबकों को मिले अधिकारों को छीनना चाहती थी. ये बातें उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शाहनवाज़ आलम ने स्पीक अप कार्यक्रम के 73 वीं कड़ी में कहीं.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि आज़ादी के बाद नेहरू सरकार ने सबको समान अधिकार देने वाला संविधान लागू किया जिसमें दलितों को दूसरे लोगों के बराबर अधिकार दिया गया. उन्हें मन्दिरों में प्रवेश का अधिकार और छुवाछूत को प्रतिबंधित किया गया तब आरएसएस उसका विरोध करते हुए पहले आम चुनाव में संविधान से इन अधिकारों को हटाने के एजेंडे पर चुनाव भी लडी थी. 2014 में भाजपा सरकार के आने के बाद से ही संविधान को बदलने की धमकी भाजपा और संघ के नेता देते रहे हैं. दलितों, पिछड़ों के आरक्षण को अप्रभावी बनाने, निजीकरण को बढ़ावा देने और आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण इसी साज़िश का हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ही एक मात्र नेता और कांग्रेस ही एक मात्र पार्टी है जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ रही है. बाकी के विपक्षी दलों को भी चाहिए कि वे राहुल गांधी जी के इस मुहीम में शामिल हो कर संविधान बचाने की अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी का निर्वहन करें.



