उत्तर-प्रदेशबड़ी खबरलखनऊ

गीत रंगोली और कथक नृत्य नवेली प्रस्तुतियों दिखे भक्ति के कई रूप

राष्ट्रीय कथक संस्थान की कथक संध्या

    1.  

      लखनऊ. राष्ट्रीय कथक संस्थान,लखनऊ
      द्वारा आयोजित कथक संध्या‘कार्यक्रम भक्ति में शक्ति हनुमन्त धाम निकट शनिदेव मन्दिर, राणा प्रताप मार्ग में आयोजित हुआ।


      1. नवरात्रि के अवसर पर होने वाले इस विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत ‘‘गीत रंगोली और कथक नृत्य नवेली‘‘ का प्रस्तुतिकरण किया गया।
    2. सर्वप्रथम गायन कार्यक्रम ‘‘गीत रंगोली ‘‘ में माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन करते हुए देवी स्तुति ‘‘अयिगिरि नन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते‘‘ के माध्यम से माता की कृपा व अनुकंपा प्राप्त करने की चेष्ठा की गयी।
    3. इसके पश्चात् भक्ति से ओतप्रोत स्तुतियां, ‘‘गणेश वंदना’’-‘नमो नमन अभिनन्दन गणपति बारम्बार प्रणाम’, राम भजन -‘‘रघुपति राघव राजा राम‘‘, कृष्ण भजन-‘‘नंद बाबा जी को छैंया‘‘, शिव स्तुति -‘‘जय महेश जटा जूट‘‘ एवं गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा इत्यादि को देवी-देवताओं को मंदिर की धार्मिक, शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय कीर्तन शैली में पवित्र मनोभावों एवं मोहक रागरागनियों में पिरोकर प्रस्तुत किया गया।
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      गायन प्रशिक्षिका- मीना वर्मा, अर्चना कुशवाहा थीं.
      गायन कार्यशाला प्रस्तुति कलाकारो में मोहित, श्रुति, शैली, अंकित, जिज्ञांशु, प्रज्ञा, संस्कृति, श्रिया, आराध्या, प्रिया थे.सहयोगी कलाकारों में
      तबले पर आनंद दीक्षित, सिंथेसाइजर पर विजय कुमार ढोलक पर अंकित कुमार,साइडरिदम पर जिज्ञांशु, मंजीरा पर शैली, यूकेलेल पर मोहित थे ।


      1. कार्यक्रम की अगली श्रृंखला के अंतर्गत नृत्य प्रस्तुति- ‘‘कथक नृत्य नवेली‘‘ का प्रारंभ सर्वव्यापी भगवान श्री हरि विष्णु की स्तुति- ‘‘जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं‘‘ एवं दुर्गा सप्तशती अर्गला स्तोत्र- ‘‘ओम जयंती मंगला काली‘‘ द्वारा शक्तिस्वरूपा मां जगदम्बा के विभिन्न स्वरूपों व महिषासुर मर्दिनी प्रसंग को कथक की मोहक भाव भंगिमाओं एवं नृत्य सौष्ठव के साथ अनूठे रूप में प्रस्तुत करने की चेष्ठा की गयी।
      2. तत्पश्चात् पारंपरिक कथक नृत्य जिसमें उपज, टुकड़े, परन, तिहाई, लड़ी इत्यादि का मनोहारी प्रस्तुतिकरण किया गया। ‘‘भक्ति में शक्ति‘‘ प्रस्तुति की सम्पूर्ण परिकल्पना, अवधारणा एवं निर्देशन संस्थान की सचिव सरिता श्रीवास्तव की थी। कथक प्रशिक्षक- विकास पाण्डेय, हुमा साहू।
        1. कथक कार्यशाला कलाकारों में मोनिका, जाहन्वी, हर्षिता, खुशी , रिदम, शिवानी, परिवेश थे ।
          अवधारणा एंव परिकल्पना सरिता श्रीवास्तव की थी.

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