लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 जुलाई को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अक्षय पात्र किचन का विधिवत शुभारंभ करेंगे। वह दोपहर 1:30 बजे बाबतपुर एयरपोर्ट आएंगे और वहां से हेलीकॉप्टर द्वारा पुलिस लाइन आकर कार से अर्दली बाजार स्थित एसडी कॉलेज जाकर अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा निर्मित रसोई का लोकार्पण करेंगे।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा व डीजीपी देवेंद्र सिंह चौहान ने वाराणसी में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के मध्यान्ह् भोजन के लिए एलटी कॉलेज परिसर में बने इस केन्द्रीकृत रसोईघर का निरीक्षण किया था। इस किचन के शुभारंभ होने के बाद वाराणसी के स्कूली बच्चों को मशीनीकृत आधुनिक रसोई से शुद्ध व पौष्टिक गरमा-गरम मध्यान्ह् भोजन (एमडीएम) मिलेगा।
वाराणसी में 1,143 परिषदीय विद्यालय हैं। अक्षय पात्र फाउण्डेशन की इस केन्द्रीकृत रसोई से स्कूली बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस केन्द्रीकृत रसोई की शुरुआत होने से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को मध्यान्ह् भोजन बनवाने से निजात मिलेगी व बच्चों को मशीनीकृत आधुनिक रसोई से शुद्ध व पौष्टिक गरमा-गरम मध्यान्ह् भोजन मिलेगा।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों अक्षयपात्र भ्रमण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पीएम मोदी के दौरे की जानकारी दी थी।
अक्षय पात्र फाउंडेशन भारत की एक अशासकीय संस्था है जो देश के 14 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 19,039 स्कूलों के 1.8 मिलियन से अधिक बच्चों को हर स्कूल दिन में पौष्टिक भोजन दे रहा है। यह फाउंडेशन दुनिया का सबसे बड़ा (गैर-लाभकारी) मिड-डे मील कार्यक्रम वर्ष 2000 से चला रहा है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना व उत्तर प्रदेश आदि राज्यो में अक्षय पात्र किचन स्थापित है। अक्षय पात्र का उद्देश्य कुपोषण का मुकाबला करना और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित बच्चों की शिक्षा के अधिकार का समर्थन करना भी है।
उत्तर प्रदेश में लखनऊ, मथुरा व गोरखपुर में अक्षय पात्र का किचन काम कर रहा है। लखनऊ में जहां 1472 स्कूलों के करीब सवा लाख बच्चों को भोजन दिया जा रहा है वहीं मथुरा में भी दो हजार स्कूलों के करीब सवा लाख बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। गोरखपुर में भी करीब डेढ़ सौ स्कूलों के 25 हजार बच्चों को दोपहर का पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। अक्षय पात्र अपनी पहुंच को बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रहा है। अक्षय पात्र का सोचना है कि भूख से कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। अक्षय पात्र फाउंडेशन वर्ष 2000 में मात्र 15 सौ बच्चों से यह सेवा शुरू किया था जो आज 1.8 मिलियन हो गया है।