युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है : प्रो. योगेश सिंह
युवा संगम फेज 7 कार्यक्रम का समापन

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय में एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के अंतर्गत आयोजित 26अक्टूबर से 1 नवम्बर तक , सात दिवसीय युवा संगम फेज 7 कार्यक्रम का समापन समारोह रविवार को गाँधी भवन में बड़े उत्साह, उमंग और राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ संपन्न हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ.नरेश ग्रोवर , निदेशक ( एआईसीटी ) दिल्ली विश्वविद्यालय में गाँधी भवन के निदेशक व नोडल ऑफिसर प्रोफेसर केपी सिंह , संयुक्त निदेशक, गाँधी भवन प्रोफेसर हंसराज सुमन , दयाल सिंह कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. भावना पाण्डेय , प्रोफेसर मनोज कुमार कैन , डॉ.मनीष कुमार , तमिलनाडु के कॉर्डिनेटर डॉ.नागेश्वर राव , मंच संचालन प्रोफेसर चारू कालरा ने किया । बता दें कि सात दिनों तक चले इस कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के 55 छात्र एवं शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रीय एकात्मता, सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान, आपसी सद्भाव, पारस्परिक सहयोग तथा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने युवा संगम फेज 7 के लिए अपना संदेश प्रेषित कर अपने प्रेरणादायी संदेश में उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है। भारत विभिन्न भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों, परंपराओं और जीवनशैलियों का देश है, किंतु इन सभी विविधताओं के बावजूद हमारी राष्ट्रीय पहचान एक है। एक भारत श्रेष्ठ भारत जैसी पहल युवाओं को देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने, एक-दूसरे के प्रति सम्मान विकसित करने तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने युवाओं को अपने संदेश में कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी और परिवर्तन के वास्तविक वाहक होते हैं। देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि उसका उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी करें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय चेतना का विकास करते हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. नरेश ग्रोवर ने अपने संबोधन में तमिलनाडु के छात्रों से कहा कि दिल्ली में हर भाषा , संस्कृति और परंपरा देखने को मिलती है , आपने भी अपने विचारों को शेयर किया होगा । उन्होंने बताया कि सरकार की यह पहल है कि युवा पीढ़ी भारत को सही से जाने और वह तभी सम्भव है जब हम महत्वपूर्ण स्थलों पर जाकर उन्हें देखें । आपने दिल्ली से बहुत कुछ सीखा होगा , यहाँ की यादें जरूर याद आती रहेंगी । नोडल ऑफिसर प्रोफेसर केपी सिंह ने युवा संगम केवल एक टूर नहीं, भारत को जीने की प्रयोगशाला है। पिछले सात दिनों में आपने हरियाणा की रागिनी से लेकर पंजाब का भंगड़ा तथा दिल्ली की भाषा तक को महसूस किया है। यही हमारी असली ताकत है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जी का एक भारत श्रेष्ठ भारत का मंत्र तब साकार होगा जब हमारा युवा अपनी संस्कृति पर गर्व महसूस करेगा । मैं आप सभी युवाओं से आह्वान करता हूँ कि आप यहाँ से अपने-अपने राज्य में जाकर इस संस्कृति के राजदूत बनें। दिल्ली विश्वविद्यालय आप सबका अपना घर है, आप फिर आइए।
एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के अंतर्गत आयोजित युवाओं के सात दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर गांधी भवन, दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक प्रो. हंसराज सुमन ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध परंपराओं में है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ तथा विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे एवं राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करें। उन्होंने कहा कि युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके भीतर सकारात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा का भाव विकसित होना आवश्यक है। उन्होंने सात दिवसीय कार्यक्रम के अनुभवों को जीवन में आत्मसात करने तथा एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को अपने व्यवहार और कार्यों के माध्यम से साकार करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का समापन भावुक क्षणों के साथ हुआ। केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के युवा एक-दूसरे को अपनी पगड़ी, टोपी और स्थानीय स्मृति चिन्ह भेंट कर विदा हुए और यह संकल्प लिया कि वे एक भारत श्रेष्ठ भारत के सच्चे सिपाही बनेंगे। सात दिवसीय कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षणिक, साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों को विभिन्न राज्यों की कला, संस्कृति, भाषा, खान-पान, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिला। विभिन्न गतिविधियों एवं संवाद सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों ने एक-दूसरे की सांस्कृतिक विशेषताओं को समझा और आपसी मैत्री तथा सहयोग की भावना को सुदृढ़ किया। समारोह के दौरान कुछ प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह सात दिवसीय कार्यक्रम उनके लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय रहा। इस कार्यक्रम ने उन्हें भारत की सांस्कृतिक विविधता को निकट से जानने और राष्ट्रीय एकता के वास्तविक महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया तथा आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों की सराहना की गई। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस प्रकार सात दिवसीय युवा कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि युवा भारत की विविधता का सम्मान करते हुए एक सशक्त, समरस, समावेशी एवं विकसित राष्ट्र के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँगे।


