गुरू अर्जुन मिश्र को शिष्यो ने अर्पित किए श्रद्धासुमन
गुरू अर्जुन से मिली कथक शिक्षा से सुरभि और शिष्याओ ने दी श्रद्धांजलि

लखनऊ । कथक गुरु पंडित अर्जुन मिश्रा जी की पुण्यतिथि पर पं कालिका बिंदादीन महाराज ड्योढी एवम कथक संग्रहालय जो कथक कलाकारो का लिए मंदिर समान है वहां पं अर्जुन मिश्र जी की वरिष्ठ शिष्या सुरभि सिंह द्वारा श्रद्धांजलि का आयोजन किया गया । कलाकार कभी मरता नही है ऐसी ही भावनाओ के साथ पं अर्जुन मिश्र जी के शिष्य- शिष्याओ अपने गुरू से प्राप्त कथक की शिक्षा के प्रदर्शन के साथ साथ नवीन प्रयोगो की प्रस्तुतीकरण किया ।लखनऊ के प्रमुख कलाकारों द्वारा उनके कार्यों को, उनके महान व्यक्तित्व को याद किया गया। पंडित अर्जुन मिश्रा जी के शिष्य देश-विदेश में प्रतिष्ठित कलाकार एवं गुरुओं के रूप में उनके कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। शिष्य-शिषयाओ के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ कथक गुरू पं अर्जुन मिश्र जी के जीवन और कार्यो के ऊपर तैयार डॉक्यूमेंट्री फिलम से किया गया। जिसमे आवाज दी है । कल्चर क्वेस्ट की सचिव सुरभि सिंह ने। त्रिपाठी के मंच संचालन में गुरु सुरभि सिंह कथक नृत्यांगना के शिष्यों जिनमें ईशा रतन मीशा रतन, अंकिता मिश्रा आकांक्षा पांडे संगीता कश्यप आरती कुशवाहा सुंदर सिंह, मानसी, अनुभव द्वारा सर्वप्रथम हाजरी लगाई गई. सबसे पहले श्रीनिवासा गोविंदा, ओम नमो द्वारा वंदना एवं भाव का प्रदर्शन प्रदर्शन हुआ। इसके उपरांत पंचम सवारी में नई रचनाओं का प्रदर्शन किया गया। सभी का साथ दिया । तबले पर अरूण भट्ट, सारंगी जीशान , पढंत कथक गुरू सुरभि सिंह दवारा किया गाय । उसके उपरांत सभा में उपस्थित कलाकारों ने जिसमें श्री राम मोहन जी, श्रीमती रामेश्वरी मिश्रा, मिथिलेश लखनवी जी, रत्नेश मिश्रा आदि ने अपने अनुभवों को साझा किया. उसके उपरांत सुरभि सिंह के शिष्यों के शिष्यों ने भी अपने शिष्य परंपरा का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। कला का संवर्धन एवं विकास सिर्फ गुरु शिष्य परंपरा से ही हो सकता है। कार्यक्रम को संचालित संजय मल्होत्रा हमनवा द्वारा किया गया एवं कार्यक्रम के अंत में अथर्व इंडिया अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान के संस्थापक डॉ. वी बी पाण्डेय जी द्वारा कथक के महान गुरुओं के जीवन को और उनकी शिक्षाओं को लिपिबद्ध करने की और उसे पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का घोषणा की गई और धन्यवाद ज्ञापित किया गया।



