साहित्य हर काल में रहा है समाज का दिग्दर्शक : डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी
साहित्य परिक्रमा के नूतन कलेवर का विमोचन, कई राज्यों और भाषाओं में होगा प्रकाशन

लखनऊ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पत्रिका साहित्य परिक्रमा के नूतन कलेवर का विमोचन शनिवार को आशियाना के सेक्टर एन स्थित चेतना डेंटल साहित्य केन्द्र में हुआ।
परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य हर काल में समाज के लिए महत्वपूर्ण रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से लेकर वर्तमान समय तक साहित्य ने समाज को विचार और दिशा देने का कार्य किया है।
निदेशक एवं मुख्य अतिथि प्रोफेसर रजनी मान ने कहा कि पाठकों की बढ़ती संख्या और पत्रिका के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए अब साहित्य परिक्रमा का प्रकाशन दिल्ली के साथ-साथ देश के कई राज्यों तथा कई भारतीय भाषाओं में किया जाएगा।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि पत्रिकाएं विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम हैं। राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल ने युवाओं और संघ के महत्व पर विचार रखे।
कार्यक्रम को परिषद के अवध प्रांत अध्यक्ष विजय त्रिपाठी, प्रख्यात दंत चिकित्सक एवं साहित्यकार डॉ. संजीव अवस्थी, डॉ. बलजीत श्रीवास्तव एवं निर्भय गुप्ता ने भी संबोधित किया। संचालन अविनाश चंद्र मिश्र ने किया। इस अवसर पर रालोद के राष्ट्रीय महासचिव अनिल दुबे, शिवशंकर अवस्थी, डॉ. रीतेश दुबे, सुरेंद्र पांडेय, पत्रकार रमाशंकर शुक्ल, आनंद मिश्र सहित अनेक साहित्यकार मौजूद रहे।


