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योग की असली कसौटी है भागदौड़ भरी जिंदगी में भी परमात्मा की याद में रहना : राजयोगिनी शिवानी दीदी

लखनऊ । नवरात्र के पावन दिनों में ब्रह्माकुमारीज के गोमती नगर केंद्र पर वरिष्ठ राजयोगिनी शिवानी दीदी का आगमन हुआ। इस अवसर पर IMRT बिजनेस स्कूल के हॉल में ब्रह्माकुमारीज से जुड़े साधकों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें लखनऊ के लगभग 20 ब्रह्माकुमारीज केंद्रों से आए साधकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में शिवानी दीदी ने राजयोग साधना, परमात्मा की याद और दैनिक जीवन में मन की स्थिरता बनाए रखने के व्यावहारिक सूत्र साझा किए।

शिवानी दीदी ने कहा कि योग की वास्तविक कसौटी केवल अनुकूल वातावरण में शांत और प्रसन्न रहना नहीं है। जब हम किसी शांत कमरे में बैठे हों, आसपास का माहौल अच्छा हो, सभी लोग प्रेमपूर्वक व्यवहार कर रहे हों और मन भी सहज हो, तब स्वयं को योग में स्थित अनुभव करना अपेक्षाकृत आसान होता है। योग की वास्तविक परीक्षा तो रोजमर्रा की भागदौड़, जिम्मेदारियों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी मन को परमात्मा की याद से जोड़े रखने में है।

उन्होंने समझाया कि परमात्मा की याद में स्थित रहने के लिए बार-बार उनका नाम दोहराना या भजन गाना अनिवार्य नहीं है। आवश्यकता है मन से परमात्मा के साथ आत्मिक संबंध बनाए रखने की। बाहरी परिस्थितियां कैसी भी हों, कार्यों का कितना भी दबाव हो या सामने कितनी भी चुनौतियां आएं, मन की स्मृति परमात्मा से विचलित न हो। इसके लिए निरंतर अभ्यास और अपने विचारों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने साधकों को प्रेरित किया कि वे राजयोग को केवल ध्यान के समय तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दैनिक जीवन और कर्मों में भी परमात्मा की याद का अभ्यास करें। इससे परिस्थितियों के बीच भी आंतरिक शांति, स्थिरता और प्रसन्नता बनाए रखने में सहायता मिलती है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ब्रह्माकुमारीज गोमती नगर केंद्र की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका राधा दीदी ने शिवानी दीदी का स्वागत किया। बीके स्वर्णलता दीदी ने कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन किया।

कार्यक्रम के समापन पर शिवानी दीदी ने सभी साधकों को पांच मिनट तक राजयोग का अभ्यास कराया और परमात्मा की याद में स्थित होने की अनुभूति कराई। इसके पश्चात सभी को प्रसाद वितरित किया गया।

इस विशेष आयोजन ने साधकों को यह संदेश दिया कि राजयोग केवल एकांत में बैठकर ध्यान करने की विधि नहीं, बल्कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में परमात्मा की याद, आंतरिक शांति और सकारात्मकता बनाए रखने की जीवनशैली है।

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