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रामहि केवल प्रेम पियारा : श्रद्धा किशोरी

छठ पूजा पार्क, न्यू कोंडली मयूर विहार फेज-3 दिल्ली में रूद्र चण्डी महायज्ञ का आयोजन

रिपोर्ट – विनीता रानी विन्नी

नई दिल्ली : छठ पूजा पार्क, न्यू कोंडली मयूर विहार फेज 3 दिल्ली में हो रहे रूद्र चण्डी महायज्ञ में आयोजित राम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान वृंदावन से पधारी श्रद्धा किशोरी जी ने कहा कि अपने जीवन का रिमोट कण्ट्रोल अपने वश में रखना चाहिए. दूसरों के हाथ में नहीं देना चाहिए. रिमोट में जैसे कोई बटन दबाओ और चैनल बदल जाता है. वैसे ही मनुष्य के जीवन का चैनल बदल रहा है. इसलिए कहते हैं कि भगवान का जो नाम है रामचरितमानस मानस से समझते हैं मानस का अर्थ है जब तक अपने मन को भगवान में नहीं लगाओगे तब तक जीवन का चरित्र बदलने वाला नहीं है.

श्रद्धा किशोरी जी रामचरित मानस के महत्त्व को समझाते हुए कहती हैं कि सब चाहते हैं कि मेरा बेटा श्रीराम जैसा बने. बेटा राम जैसा कब बनेगा जब रामायण हाथ में होगी.जब तक रामायण हाथ में नहीं दोगे तब तक राम जैसा नहीं बन सकता. राम जैसा वह भी बन सकता है परंतु जब तक उसके जीवन में रामायण जैसा संस्कार नहीं आएगा. कथा कितनी भी सुन लो परंतु भगवान राम का चरित्र जब तक जीवन में नहीं उतारोगे. तब तक जीवन सुंदर नहीं होगा.
वे कहती हैं कि रावण कितना ज्ञानी था. ज्ञान की कमी नहीं थी रावण के अंदर परंतु चरित्र बिगड़ा तो सब बिगड़ गया. कहते हैं  धन गया कुछ नहीं गया, चरित्र गया सब चला गया.
चरित्र का होना बहुत जरूरी है इसलिए तो गोस्वामी जी ने लिखा.
श्रद्धा किशोरी जी कहती हैं कि आंखों की विशेषता है सुंदर चीजों को देखना. कान की विशेषता अच्छी बातों व विचारों को सुनना है. जीभ की विशेषता स्वादिष्ट बढ़िया से बढ़िया पदार्थ मिल जाए खाने को. संसार का मनुष्य यही तो कर रहा है दृष्टि देख रही है कहां-कहां इस संसार में चला जाए घूम आए लेकिन कहते हैं रामचरितमानस की अगर आप कथा सुन रहे हो तो पहले तो अपने मन को सुंदर करो अगर मन सुंदर हो गया साफ हो गया तो भगवान में आपका मन लग जाएगा. वे कहती हैं कि हमारी भक्ति एकदम गुलाब जामुन की चाशनी जैसी होनी चाहिए. भक्ति करते हैं भक्ति का तार टूटना नहीं चाहिए जैसे अभी आप नियम से भगवान की कथा सुन रहे हो ना, अब आपको क्या लगता है कि हमारी भक्ति का तार टूटे या जुड़ा रहेगा. जहां – जहां सत्संग मिले वहां पहुंच जाओ और जब नहीं मिलता तो घर में भी विधि बतायी गयी है.
श्रद्धा किशोरी जी ने श्रोताओं से कहा कि हमें सत्यनारायण की कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए. सत्यनारायण की कथा घर में सुनो वर्ष में एक बार हमें भागवत कथा सुनना चाहिए. कहते हैं घर में पूजा पाठ अनुष्ठान अवश्य होना चाहिए. आप अगर अनुष्ठान करते हो घर में तो घर का वातावरण सुंदर होता है तो मन भी सुंदर होता है. राम कथा यानी जीवन में कैसे रहना चाहिए परिवार में कैसे रहना चाहिए, समाज में कैसे रहना चाहिए, हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए यह राम कथा सिखाती है अगर हमारा व्यवहार अच्छा नहीं हुआ तो कितना भी आप राम की कथा सुन लो कोई लाभ नहीं है क्योंकि लाभ ही तो चाहिए.
. राम कथा सिखाती है, परिवार में रिश्तों में कैसे रहना चाहिए. यह मर्यादित कथा है. भगवान राम का ऐसे ही मर्यादा पुरुषोत्तम नाम नहीं पड़ा है. आज संसार का व्यक्ति मर्यादा को तोड़ता जाता है. घर-घर में आज लोग अलग-अलग व्यवहार कर रहे हैं. राम जी चार भाई थे उनका जीवन कैसा था उनके जीवन में कभी विवाद नहीं होता था जब भी होता था भाई भाई में संवाद होता था. कथा तो आप लोग सुन रहे हो और कितना भी कोई राम कथा सुन ले लेकिन भाई-भाई में कितनी बनती है. पिता और पुत्र राम कथा सुन रहे हो तो पिता पुत्र में कैसा प्रेम होना चाहिए.
संत कहते हैं तपस्या करो. पहले पिता भोजन करता था तो पुत्र उसको ग्रहण करते थे और आज तो अलग-अलग कमरे में करते हैं.

मनु महाराज की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान नारायण ने दर्शन दिया और मनु महाराज से कहा कि आपने इतनी कठिन तपस्या की है. मांगो आपको क्या चाहिए और जैसे ही मनु महाराज ने भगवान को देखा तो कहा कि जब मुझमें आप हो तो मुझे क्या चाहिए. भगवान ने कहा कि आपने कठिन तपस्या की है. इसका फल आपको अवश्य मिलेगा. त्रेता में मेरा राम अवतार होगा और मैं तुम्हारा पुत्र राम बनकर उस समय आऊंगा तुम हमारे पिता दशरथ हो लेकिन पत्नी ने भी उतनी ही तपस्या की है जितनी मनु महाराज ने की है. शतरूपा से भगवान ने कहा कि तुमने भी कठिन तपस्या की है, शतरूपा ने कहा हे प्रभु आप दानियों में शिरोमणि हो जिस तरह से कल्पवृक्ष के मांगने से सब कुछ प्रदान हो जाता है अगर कोई भक्त सच्चे मन से मांगे तो आप सबकुछ न्योछावर कर देते हो अगर आपको कुछ देना है तो मुझे वही दुख देना जो मेरे पति का है, जो मेरे पति का है मुझे वही रहन-सहन देना जो मेरे पति का है देखा जाए तो शतरूपा ने भगवान से कुछ नहीं मांगा लेकिन संसार में कोई ऐसी नारी हो सकती है सतगुरु का क्या मांग कर रही है.

श्रद्धा किशोरी जी कहती हैं कि भगवान से मांग मत करो हम मांग बहुत तेजी से भगवान से करते हैं यह चीज मिल जाए, वह चीज मिल जाए, अभी मिल जाए भगवान कहते हैं तुम चाहे जितना भी आकर मेरे द्वारा पर सर पटक लो परंतु जब समय आएगा तभी मिलेगा. इसलिए भगवान कहते हैं करता तो वही है जो तू चाहता है पर होता वही है जो मैं चाहता हूं. तू वही कर जो तू चाहता है, होगा वही जो मैं चाहता हूं. भगवान कहते हैं जो तू जैसा चाहता वैसा कर ले लेकिन जो मैं चाहूंगा, वही होगा. जब तक भाग्य में नहीं होगा तब तक कुछ मिलने वाला नहीं.

मीरा ने जब भक्ति की तो लोगों ने पागल कहा लेकिन मीरा कृष्ण के प्रेम और भक्ति में रहती है. अगर मुझे कोई बावरी भी कहता है तो मुझे फर्क नहीं पड़ता है. ठीक उसी प्रकार से कहते हैं भक्ति, धर्म, कर्म अगर आप कर रहे हो तो पीछे वाला करेगा नहीं लेकिन आपको खींचेगा अरे यह सब तो नाटक है, इतना समय तुम्हारे पास है ना वह करेगा नहीं नास्तिक जो लोग होते हैं ना करेंगे ना करने देंगे लेकिन शबरी जैसी भक्ति करो. संसार हमें क्या कहता है इस पर ध्यान ना दो. संसार का मनुष्य सिर्फ दूसरों की सुनता है तो कभी किसी की सुनो मत. कहते हैं जीवन का एक सूत्र है अगर कोई बुरा व्यक्ति आपको मिलता है उसको समय मत दो.

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