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लखनऊ स्पेक्ट्रम कला मेला–2025” के लोगो और पोस्टर का अनावरण

लखनऊ : भारत की सांस्कृतिक राजधानी लखनऊ, जहाँ तहज़ीब और रचनात्मकता एक साथ चलती रही हैं और आजभी चल रही हैं, वहाँ सोमवार, 13 अक्टूबर 2025 को फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी में “लखनऊ स्पेक्ट्रम कला मेला–2025” के लोगो और पोस्टर का अनावरण हुआ। यह क्षण केवल एक कला आयोजन की घोषणा नहीं था, बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्तियों के एक नए अध्याय का उद्घाटन था। अनावरण कार्यक्रम में गैलरी की निदेशक नेहा सिंह, फिनिक्स पलासियो के सीनियर सेंटर डायरेक्टर संजीव सरीन, विनय शहाणे, क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना और राजेश कुमार एवं शुभम यादव उपस्थित रहे। 2019 में स्थापित फ्लोरेसेंस गैलरी ने अपने आरंभ से ही यह सिद्ध किया है कि वह मात्र एक प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा सृजनात्मक आंदोलन है जो कला को सुलभ, संवादमय और संग्रहणीय बनाने का स्वप्न लिए आगे बढ़ रहा है।

संजीव सरीन,सीनियर सेंटर डायरेक्टर फिनिक्स पलासियो एवं नेहा सिंह निदेशक, फ्लोरसेंस आर्ट गैलरी, ने इस अवसर पर कहा कि “लखनऊ स्पेक्ट्रम-2025” कल्पना और नवाचार के माध्यम से कला की एक साझा भाषा विकसित करेगा—एक ऐसी भाषा जो कलाकार और दर्शक के बीच की दूरी को मिटाने का प्रयास करेगी। यह महोत्सव 1 से 30 नवम्बर 2025 तक लखनऊ के प्रतिष्ठित फीनिक्स पलासिओ में आयोजित होगा, जहाँ 50 से अधिक कलाकारों की 200 से अधिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित होंगी। इन रचनाओं में चित्रकला, मूर्तिकला, चीनी मिट्टी की कलाएँ, प्रिंटमेकिंग और मिट्टी के शिल्प जैसे विविध माध्यम शामिल होंगे।
इस बार का स्पेक्ट्रम केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव होगा — जहाँ दर्शक केवल कला को देखेंगे नहीं, बल्कि उससे संवाद करेंगे, सीखेंगे और शायद स्वयं सृजन में उतर आएँगे। कार्यशालाएँ, कलाकार संवाद, लाइव आर्ट सेशन और सामूहिक रचनात्मक प्रयोग इस आयोजन को एक जीवंत उत्सव में बदल देंगे।
क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने कहा कि लखनऊ सदा से कलाकारों और रचनाकारों की भूमि रही है, और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह मेला कला की विविध माध्यमों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। इस वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों से चुने गए कलाकार अपनी कृतियों के माध्यम से न केवल समकालीन दृष्टि प्रस्तुत करेंगे, बल्कि लोक, जनजातीय और पारंपरिक कलाओं की आत्मा को भी सामने लाएँगे।
इस आयोजन के तीन क्यूरेटर—भूपेंद्र कुमार अस्थाना, राजेश कुमार और गोपाल सामंतराय—ने मिलकर इसे रचनात्मकता का एक संगम बनाया है। यहाँ पद्मश्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकारों की प्रतिष्ठित रचनाओं के साथ-साथ युवा कलाकारों के नवाचारपूर्ण प्रयोग भी देखने को मिलेंगे। फ्लोरेसेंस की यह पहल लखनऊ की सांस्कृतिक धड़कनों को एक नए स्वर में गूँजाने जा रही है—जहाँ परंपरा और आधुनिकता, लोक और समकालीनता, विचार और अनुभव मिलकर एक ऐसा स्पेक्ट्रम रचेंगे, जिसमें शहर की आत्मा और कला का उजास साथ-साथ झिलमिलाएगा। ज्ञातव्य हो कि पिछले दिनों गैलेरी द्वारा एक बड़ा कला उत्सव सी आई ए एफ का सफलतम आयोजन किया गया था जिसमें कलाकार कलाप्रेमीयों ने भारी संख्या में आन्नद लिया था।

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