प्रबोधनी के नेतृत्व में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेटिक लीडरशिप का 8वां दीक्षांत समारोह आयोजित
मनसुख मांडविया, वीरेंद्र सचदेवा, सहस्त्रबुद्धे ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेटिक लीडरशिप द्वारा पास हुए बच्चों को सर्टिफिकेट व स्मृति चिह्न देकर बधाई दी

नई दिल्ली : देश की जानी मानी संस्थान प्रबोधनी के नेतृत्व में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेटिक लीडरशिप के 8वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और विशेष अतिथि के तौर पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भाग लिया। विनय सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता में आयोजित दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय संगठक वी सतीश, डॉ जयंत कुलकर्णी, श्री कमलकांत पाठक सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि मनसुख मांडविया और वीरेंद्र सचदेवा ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेटिक लीडरशिप द्वारा पास हुए बच्चों को सर्टिफिकेट और स्मृति चिह्न देकर बधाई दी।
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि दो तरीके से महत्वपूर्ण है। लीडरशिप कई तरीके से हो सकते हैं आर्थिक, सामाजिक लेकिन आप लोगों ने राजनीति क्षेत्र में लीडरशिप को चुना है और इस लाइन में अगर सचमुच लीडर बनना है तो अपने लक्ष्य को निर्धारित करने होंगे। दूसरा आपको भविष्य में अगर लीडरशिप करना है तो एक साल का प्रशिक्षण आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है ताकि इस बात की जानकारी मिल सके कि आपको कब और कितना बोलना है।मां
डविया ने कहा कि लेगेसी से चलने वाली डेमोक्रेसी मुख्य डेमोक्रेसी नहीं है बल्कि देश में रहने वाले सभी लोगों को देश में अपना योगदान देने के लिए अवसर मिलना चाहिए इसलिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि देश में 1 लाख युवा लीडरशिप चाहिए। उन्होंने कहा कि देश आपको मौका दे रहा है कि आप आइए और इस डेमोक्रेसी का हिस्सा बनिए। आपके जज्बे, काम करने का तरीका और देश के प्रति अपने समर्पण से लीडरशिप आती है। आज आपके सामने एक किसान का बेटा केंद्रीय मंत्री के रूप में है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ख़ुद इस बात का ध्यान रखना होगा कि आख़िर हमें लीडर क्यों बनना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जब लाल क़िला से विकसित भारत और अमृत काल का नारा दिया तो उस वक्त उन्होंने सिर्फ़ यह कहा नहीं बल्कि इसका रोड मैप भी दिया। विरासत से प्रेरणा लेना, ग़ुलामी की मानसिकता को छोड़ेंगे और देश के प्रति हमारे 140 करोड़ जनता देश के प्रति निर्वहन करने का जज्बा रखे। इन भावनाओ के साथ हम देश में आगे बढ़ेंगे और 2047 तक देश विकसित राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ेंगा।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि भारत इस समय एक अत्यंत रोचक दौर से गुजर रहा है। यह आकांक्षाओं का युग है – एक बेहतर जीवन की चाह हर दिशा में दिखाई देती है। इन जन आकांक्षाओं को पूर्ण करने की ज़िम्मेदारी उन सभी पर है जो समाज का नेतृत्व करते हैं। राजनीति, मीडिया और स्वयंसेवी संगठनों से जुड़े नेताओं की भूमिका इन आकांक्षाओं को आकार देने और उन्हें साकार करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि जहाँ जन्मजात नेता सदैव कम ही होते हैं, वहीं आज ऐसे लोगों की भी भारी कमी है जो स्वयं में नेतृत्व की क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास करें और अपने को एक प्रभावी नेता के रूप में ढालें। सच्चा नेतृत्व केवल पहल, साहस और व्यक्तित्व से ही नहीं बनता, वह प्रेरणा से उपजता है, उसका साहस दृढ़ विश्वास पर आधारित होता है और उसके मूल में सिद्धांत होते हैं।
सचदेवा ने कहा कि आज सौभाग्य से हमारा लोकतांत्रिक तंत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक भागीदारीपूर्ण और संवादात्मक हो गया है। और आज जो हम यहाँ छात्र को देख रहे हैं ऐसा लगता है आने वाला समय महाराष्ट्र और केरल का है।
विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि सिर्फ देश में ही नहीं पूरे विश्व में एक धरना था और श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी जी भी उसका उल्लेख करते थे कि राजनीति, फ़िल्म लाइन में और मीडिया जगत के लिए किसी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है लेकिन अब समय बदल रहा है और प्रबोधनी ने अपने ही संस्थान इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेटिक लीडरशिप के माध्यम से इसपर ध्यान दिया और ऐसे युवाओं का निर्माण करने का काम पिछले 8 वर्षों से शुरू कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को आकलन नहीं होता है और युवाओं के अंदर ऐसी धारणा बन गई कि राजनीति भी एक तरह की संस्था बन गई है। लेकिन प्रबोधनी द्वारा संचालित आई आई डी एल ने आज इस मिथ को तोड़ने में सफल रहा है।



