“सियाराम मय सब जग जानी” का मंचन

रायबरेली। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रायोजित भारतेंदु नाट्य अकादमी, संस्कार भारती अवध प्रांत और गोपाल सरस्वती विद्या मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में सत्य समर्पण रंगमंडल की नवीनतम संगीतमय प्रस्तुति *”सियाराम मय सब जग जानी”* का मंचन गोपाल सरस्वती विद्या मंदिर, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रतापुर चौराहा, रायबरेली के प्रांगण में परिकल्पना, लेखन, संगीत व बाजपेई, श्री गोविंद सोनी, सुश्री तमन्ना सिंह, श्री पवन गुप्ता, श्री आशीष जी इत्यादि लोगों के संग अनेकानेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
प्रभु श्रीराम के जन्म से लेकर धनुष यज्ञ प्रसंग तक की लीला का मंचन किया गया। इस प्रस्तुति में विद्यालय के छात्र–छात्राओं ने अपनी विलक्षण प्रतिभा से दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया।
इस संगीतमय नाट्य प्रस्तुति में प्रभु राम के आदर्श व चरित्र का पूर्ण चित्रण है। पहली बार रामायण के प्रसंग में मंच पर 2025 में नारदजी का आना और सूत्रधार के रूप में समाज को प्रभु श्रीराम की लीला व उनके सुकृत्यों का वर्णन कर उनके मर्यादित व्यक्तित्व व उत्कृष्ट भावों से समाज को अभिप्रेरित करना प्रस्तुति में नवीनता दर्शाता है। नारद जी का आगमन इस प्रस्तुति को रोचक बनाता है। राम-सीता विवाह इस कहानी में श्रृंगार रस का संचार करता है। श्रीराम जन्म से लेकर धनुष यज्ञ व सीता स्वयंवर तक का यह प्रसंग कला के विभिन्न रंगों पर केन्द्रित रहा है। धनुषयज्ञ तक की सम्पूर्ण लीला को सविस्तार वर्णित किया गया है, जिसमें दर्शाया गया है कि कैसे प्रभु श्रीराम त्रेतायुग में वो सारे संदेश दे चुके थे जो कलयुग के कल्याणार्थ थे। प्रभु अपनी लीला रचते हुए समाज को गंगा सफाई अभियान, राजा का प्रजा के प्रति उदार स्वभाव, बड़े छोटों का आदर जैसे अनेकानेक संदेश देते हैं। अनेकानेक प्रयोग व अनुप्रयोग किये गए है जो कि एक अलग दृष्टि से देखने की अनुभूति देता है।
ये 10 दिवसीय प्रस्तुतिपरक कार्यशाला के समापन के उपरांत प्रस्तुति रंगमंच कार्यशाला के प्रशिक्षण के अंतर्गत लगातार संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियों के लेखक, अभिनेता व निर्देशक *अमित दीक्षित “राम जी”* के मार्गदर्शन में *”रामायण के संग, नौटंकी के रंग”* शीर्षक से अभिनय, संगीत व नृत्य प्रशिक्षण के अंतर्गत हुई। इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को अभिनय, गायन व नृत्य विधा के विषय में गहनता से बड़े ही भावपूर्ण व सधे ढंग से किया गया है। निर्देशक ने इस प्रस्तुति को प्रयोगात्मक व संगीतमय ढ़ंग से एक अलग रूप में प्रस्तुत किया है।
60 से अधिक कलाकारों की भव्य संगीतमय प्रस्तुति एक अनूठी मिसाल बनी। इस प्रस्तुति में श्रीराम की भूमिका सृजन तिवारी, लक्ष्मण अविरल द्विवेदी, सीता सौम्या अग्निहोत्री, नारद हिमांशु अग्रहरि, विश्वामित्र अनघ त्रिवेदी, राजा जनक अथर्व पांडेय, राजा चिमिरखी आर्षभ सिंह ने निभायी। गायन मण्डली मे दृष्टि पाण्डेय, गौरी एवं श्रेयांशी थे। इस प्रस्तुति में नृत्य अंशिका श्रीवास्तव, आर्या तिवारी, अंशिका रस्तोगी, रिया सिंह, शिवी सिंह, रिद्धि सिंह , श्रेया नृत्यांगनाएं थीं। मंच पर मुख सज्जा विवेकानंद शुक्ला ने किया। ढोलक एवं
तबले पर पुनीत , आर्गन पर राम कृष्ण, हारमोनियम पर दृष्टि पाण्डेय ने किया व *परिकल्पना, लेखन, संगीत व निर्देशन अमित दीक्षित ‘राम जी’* द्वारा किया गया।



