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संस्कृति पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को आर्टिस्ट फोरम उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा

लखनऊ : जीर्णो़द्धार के बाद राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह का लोकार्पण करने आए संस्कृति पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को आज आर्टिस्ट फोरम उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रेक्षागृह का किराया अधिकतम ड्योढ़ा कर साढ़े चार हजार रुपये करने, प्रसाद सभागार पहले की भांति कम किराये पर उपलब्ध कराने और अतिथि कक्ष, गुलाबबाई कक्ष इत्यादि की पूर्वाभ्यास व्यवस्था बहाल करने का आग्रह है। फोरम ने ज्ञापन की प्रतियां प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम, भातखण्डे सं.विवि कुलपति माण्डवी सिंह व कुलसचिव डा.सृष्टि धवन, पद्मश्री मालिनी अवस्थी और बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष डा.कुमकुम धर को भी सौंपी।
उक्त जानकारी देते हुए फोरम के संयोजक प्रभात मिश्र ने बताया कि भातखण्डे प्रशासन का इरादा बली हाल का किराया लगभग साढ़े तीन गुना बढ़ाने का है, जो कलाकारों के साथ अन्याय है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत सहेजने के लिए काम कर रहे कला संस्कृति के संस्थानों का उद्देश्य ऐसे प्रेक्षागारो-सभागारों से धन कमाना नहीं, कलाओं को प्रश्रय और प्रोत्साहन देते हुए संस्कृति-संस्कारों, कलाओं-लोक कलाओं और परम्पराओं पर प्रयोग और प्रसार के लिए कलाकारों और नयी पीढ़ी को अपनी परम्पराओं और संस्कृति के प्रति संस्कारित व शिक्षित करना है। फोरम के प्रतिनिधियों प्रभात मिश्र व सोनी त्रिपाठी ने संस्कृति मंत्री से मुलाकात कर कलाकारों की समस्याओं से अवगत कराने के संग ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि बली प्रेक्षागृह का किराया साधारण कला संस्थाओं की पहुंच के दायरे में रखते हुए अधिकतम ड्योढ़ा करते हुए साढ़े चार हजार रुपए से अधिक न किया जाए।.कम किराये पर बली प्रेक्षागृह उपलब्ध होने के साथ रंग संस्थाओं को पूर्वाभ्यास के लिए नौटंकी कलाकार गुलाबबाई के नाम पर गुलाब बाई कक्ष भी चार चार घंटे की तीन शिफ्टों में मात्र एक सौ रुपये प्रति शिफ्ट प्रति दिन के किराए पर उपलब्ध होता था। यह सुविधा भी रंगकर्म प्रोत्साहन के नाते पुनः अधिकतम डेढ़ सौ रुपये सस्ती दरों पर बहाल की जाए। बली प्रेक्षागृह के ठीक पीछे दो हाल भी रंग संस्थाओं को पूर्वाभ्यास स्थल के रूप में उपलब्ध कराने के लिए तैयार कराए गए थे, किंतु बाद में वहां राष्ट्रीय कथक संस्थान यानी वर्तमान बिरजू महाराज कथक संस्थान की कक्षाएं चलने लगीं और वह हाल भी उपलब्ध नहीं रह गए। वर्तमान परिस्थितियों में रंगकर्म को बढ़ावा देने के लिए बली प्रेक्षा गृह कला परिसर में गुलाब बाई कक्ष के अतिरिक्त कम से कम एक और पूर्वाभ्यास कक्ष सस्ती दरों पर कलाकारों और रंग संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाएं।
ज्ञापन के चौथे बिन्दु में कहा गया है कि बली कला परिसर कैसरबाग में रंग संस्थाओं को परिसंवाद संगोष्ठी, सेमिनार आदि के आयोजन के लिए प्रोजेक्टर और माइक्स आदि की सुविधा के साथ 70-75 लोगों की क्षमता वाला जयशंकर प्रसाद सभागार मात्र डेढ़ हजार रुपए के किराये पर उपलब्ध होता था। मरम्मत के लिए बंद होने के दौरान ही उक्त प्रसाद सभागार भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय को हस्तांतरित हो गया और मरम्मत के बाद तैयार होने के बावजूद रंगकर्मियों का हक़ मारकर आज तक रंगकर्मियों और रंग संस्थाओं को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। कृपया, प्रसाद सभागार पहले की भांति रंग संस्थाओं को अधिकतम दो हजार रुपये किराए पर उपलब्ध कराया जाए ताकि, संगोष्ठी सेमिनार आदि का लगभग थमा हुआ क्रम फिर से गतिमान हो सके। पंजीकृत रंग संस्थाओं के लिए भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के अधीन कला मण्डपम प्रेक्षागृह का किराया भी 40 हजार से कम कर 10 हजार रुपए किया जाए। बली कला परिसर कैसरबाग में पहले सस्ती दरों पर कैण्टीन की व्यवस्था भी थी, यह व्यवस्था भी कलाकारों और प्रेक्षकों के लिए पुनः प्रारंभ की जाये। दोपहिया वाहन स्टैंड की व्यवस्था भी पहले की भांति बली प्रेक्षागृह कला परिसर में निशुल्क हो।

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