छन्दमुक्त कविता में भी गति, लय और प्रवाह : विजय त्रिपाठी

लखनऊ। सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. राम मनोहर मिश्र की साहित्यिक कृतियों पर शनिवार को परिचर्चा हुई। गोमती नगर स्थित दयाल पैराडाइज में हुए आयोजन में वक्ताओं ने मिश्र की रचनाओं को संवेदनाओं की सूक्ष्मतम अभिव्यक्ति बताते हुए पहली कृति पहचान और दूसरी कृति लाडली पर विस्तार से चर्चा की। शुभारंभ मुख्य अतिथि आईएएस हरिकांत त्रिपाठी, स्टॉककार्ट के प्रबंध निदेशक शशांक गुप्ता सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मा. सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार दयानंद पांडेय ने की।
विशिष्ट अतिथि विजय प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि राममनोहर मिश्र की लाडली नामक कृति खण्डकाव्य के मानक पूरी करती है। इसकी नायिका नव्या विलियम वर्ड्सवर्थ की लूसी से आगे निकलती है। मिश्र की रचनाओं में भावों का व्यतिक्रम नहीं है, भाषा संस्कृतनिष्ठ है तथा छन्दमुक्त कविता में भी गति, लय और प्रवाह है।
पहचान कृति पर चर्चा करते हुए विशिष्ट अतिथि बलदेव त्रिपाठी ने उसे मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति और भावनाओं का सुन्दर सम्प्रेषण बताया तथा उदासी व कैनवास कविताएं पढ़ीं।
अध्यक्षीय वक्तव्य में वरिष्ठ साहित्यकार दयानंद पांडेय ने विविध प्रसंगों का उल्लेख करते हुए राममनोहर मिश्र की रचनाओं के भाव भूमि की सराहना की।
समारोह का संचालन करते हुए साहित्यकार सुशील चंद श्रीवास्तव ने कहा कि मिश्र की लेखनी से संवाद न केवल रचनाशीलता का विस्तार है अपितु अनुभव और संवेदना का साक्षात्कार भी है। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में लोगों को वित्तीय आवश्यकताओं और उनकी पूर्ति के लिए वित्त प्रबंधन को आवश्यक बताते हुए उससे जुड़ी जानकारियां साझा की गयीं।
आयोजन में अमरनाथ उपाध्याय, बालेन्दु द्विवेदी, वेदप्रकाश त्रिपाठी, डा. अरविन्द चतुर्वेदी, आईएएस डॉ. अशोक चन्द्रा, प्रतिभा मिश्रा, छायानट के पूर्व सम्पादक डॉ. एस.के.गोपाल, सुधा द्विवेदी सहित अन्य उपस्थित रहे।


