स्मृति शेष के. विक्रम राव : ‘ऐसी जीवटता से विरले ही जीवन जीते हैं’

कामरेड विनीता रानी विन्नी
पत्रकारिता की आन बान शान इंडियन फ़ेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के विक्रम राव ने अपनी कलमकारी का परचम देश-विदेश में फहराया. इमरजेंसी में जेल में रहने वाले कलम के सिपाही डॉ. राव ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में भी हार नहीं मानी, दिनों दिन उनकी कलम मजबूत होती गयी, पत्रकारिता जगत के इस सिपाही की कलम अंतिम सांसों में भी नहीं थमी, इस जीवंत उदाहरण को कभी भी भुलाया नहीं जा पायेगा. आज बहुत भारी मन से अपने पिता तुल्य डॉ. के विक्रम राव के बारे में कांपती उगलियों से लिखने को विवश हूं, यह सत्य है कि जो आया है उसे एक ना एक दिन दुनियां से विदा लेनी ही है. मगर राव जैसी आत्माएँ कभी मरती नहीं. इस कलमकार ने शायद ही ऐसा कोई पत्रकार रहा होगा जिसको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित ना किया हो. जब भी मिलते लेखन व पत्रकारिता सम्बन्धी बातें करते. आजकल कहाँ हो, क्या लिख पढ़ रही हूं. मुझसे ऐसी ही बातचीत होती. पुस्तकें पढ़ने के लिए कहते. मुझे कामरेड बनाने वालों में स्व. जे. पी. तिवारी, श्री हसीब सिद्दीकी जी, स्व. के विक्रम राव का योगदान मैं कभी नहीं भुला सकती.
. स्व. राव हमेशा पत्रकारों के हितों के लिए चिंतित रहे. कई आन्दोलन चलाये.सरकारों से मागें पूरी करायीं. कई संगठनों के साथ लम्बे आन्दोलन किए.
मेरे पोर्टल चेरिश टाइम्स पर लगातार अपने आर्टिकल देते रहे, रोज शाम को जब पोर्टल पर खबरें लगाना शुरू करती थी तो राव सर ने आज क्या लिखा उसपर सबसे पहले नज़र पड़ती, उसे पहले पढ़ती फिर लगा देतीं वे किसी विषय को नहीं छोड़ते थे. हाल में चल रहे भारत-पाक युद्ध पर भी इस सप्ताह उन्होंने लिखा. बहुत से संस्मरण लगातार लिखते रहे. यही राव जी की कर्मठ पत्रकारिता को दर्शाता है. अब मैं राव जी के लेख को प्रकाशित करने को तरसूंगी क्योंकि उनके जैसे कलमकार लाखों में एक होते है.
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मिलकर राव जी ने अपनी दो पुस्तकें उन्हें भेंट की. ऐसी जीवटता से विरले ही जीवन जीते हैं. ईश्वर परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे व स्व. राव जी को अपने श्री चरणों में स्थान दे, विन्रम श्रद्धांजलि, ॐ शान्ति.






