लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड की हेरिटेज वॉक: इतिहास, तहज़ीब और स्वाद का संगम

लखनऊ । लखनऊ कनेक्शन वर्ल्डवाइड (LCWW) ने अपनी विशिष्ट शैली में एक और यादगार रात्रि हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। शाम 7.30 बजे के बाद चौक से रूमी दरवाजे तक के इस ऐतिहासिक सफर में लखनऊ की विरासत, खानपान और गंगा-जमुनी तहज़ीब के रंग घुलते चले गए। यात्रा की शुरुआत रूमी गेट से हुई, जहां समूह का स्वागत करने के लिए संगीत प्रेमी शोएब कुरैशी साहब पहले से मौजूद थे। उन्होंने सभी का खुले दिल से इस्तकबाल किया और इस वॉक को एक जश्न का रूप दे दिया।
वहीं, इसी स्थान पर एक सुखद संयोग हुआ, जब सदस्यों ने एक नवदंपति को अपनी नन्हीं बेटी पीहू का जन्मदिन मनाते देखा। उनकी खुशी में चार चांद लगाने के लिए राहुल पांडेय की गिटार की मधुर धुन पर सभी ने गीत गाए और नन्हीं पीहू को आशीर्वाद दिया। यह अनायास हुआ सेलिब्रेशन इस ऐतिहासिक स्थल पर एक नई यादगार जोड़ गया।
इसके बाद वॉक का असली उद्देश्य सामने आया – लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों और उनकी विरासत को समझना। इस पूरे सफर में हिस्टोरियन आतिफ अंजर ने ऐतिहासिक स्थलों के बारे में गहरी जानकारी साझा की। उन्होंने रूमी दरवाजे की वास्तुकला और सतखंडा की अधूरी कहानी पर रोशनी डाली। साथ ही क्लाक टावर और बारादरी की भी चर्चा हुई। हर स्थल पर लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत झलक महसूस की गई। यह वॉक सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें शहर के बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवेश पर भी चर्चा हुई। आतिफ अंजर ने बताया कि चौक और पुराने लखनऊ के इलाकों ने कैसे नवाबी दौर से लेकर आधुनिक समय तक लखनऊ की आत्मा को संजोकर रखा है।
इतिहास को आत्मसात करने के बाद बारी थी लखनऊ के मशहूर जायकों की। ग्रुप के कुछ सदस्यों ने नवाबी कबाब-पराठे, मटन कोरमा और बोटी कबाब का आनंद लिया, जबकि शाकाहारी सदस्यों ने तीखी टिक्की, खस्ता बताशे और चटपटे मटर का स्वाद लिया। यात्रा के अंतिम पड़ाव पर जब सभी मोइन की कश्मीरी चाय की दुकान पर पहुंचे, तो वहां अलग ही माहौल बन गया। अनिल शुक्ला, जो कनाडा से आए हैं, ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा – ” ऐसी मुंह लगी है कि कमबख्त छूटती नहीं ।यह पिछले तीन दिनों में मेरी इस टी स्टाल की दूसरी विजिट है, फिर भी दिल नहीं भरता!”
जब समूह घंटाघर के पास बावली की सीढ़ियों पर पहुंचा, तो संगीत का जादू बिखर गया। कुछ सदस्य गिटार पर धुन छेड़ने लगे, गीतों की गूंज से पूरा माहौल जीवंत हो गया। इसी दौरान वहां रानी नाम की एक युवती, सीढ़ियों पर गहरी नींद में सोई मिली। संगीत की आवाज़ से पहले वह थोड़ा परेशान हुई, लेकिन धीरे-धीरे वह भी इस माहौल में सहज हो गई। नीरजा शुक्ला की नजर उस पर पड़ी, उन्होंने पास जाकर उसका हाल-चाल पूछा। जब पता चला कि उसे मदद की ज़रूरत है, तो LCWW के सदस्यों ने तुरंत धनराशि जुटाई और उसके लिए भोजन एवं अन्य सहायता का प्रबंध किया। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल भी थी।
इस पूरे सफर के दौरान एक खास बात यह भी रही कि समूह के सभी सदस्यों ने अपने मुस्लिम भाइयों को रमज़ान की मुबारकबाद दी और इस मुकद्दस मौके पर खुशियां बांटीं। यह लखनऊ की तहज़ीब की वह मिसाल थी, जिसने इस सफर को और भी खास बना दिया।
यात्रा के समापन पर जब सभी रूमी दरवाजे पर लौटे, तो वहां राजेन्द्र सिंह पवार के सुरों में ऐसा जादू बिखरा कि पूरा समूह थिरकने लगा। पुराने बॉलीवुड गीतों की धुनों पर सबने मिलकर डांस किया, मानो यह किसी शादी की बारात हो। इस पूरे सफर को यादगार बनाने में जिन सदस्यों ने खास भूमिका निभाई, वे रहे – रश्मि मिश्रा , राजीव सक्सेना, नवीन कोहली, मनीष भारतीय, प्रदीप शुक्ला, ममता श्रीवास्तव, सचिन तिवारी, बाल कृष्ण शर्मा, रामेश्वर दयाल गुप्ता, नीरजा शुक्ला, निधि भटनागर, प्रियंका पांडे, मीनू श्रीवास्तव, कविता मिश्रा, अनन्या मिश्रा, विभा शुक्ला, रेखा कोहली, छाया सक्सेना, बेबी श्रीवास्तव, अन्विता मनीष, अवनी शुक्ला, रिद्म पांडे और कई अन्य।
अनिल शुक्ला ने इस आयोजन को लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब की बेहतरीन मिसाल बताते हुए कहा – “बड़ी संख्या में विभिन्न जाति-धर्मों के लोगों का इस आयोजन में उन्मुक्त भाव से शामिल होना लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक शानदार मिसाल है।” वहीं, वरिष्ठ सदस्य अजय मिश्रा ने कहा – “आपसी भाईचारे, मोहब्बत, सौहार्द, प्रेम, इंसानियत और संवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है ये हेरिटेज वॉक।”
सिराज जैदी साहब ने तस्वीरें देखकर लिखा – “फिर नींद से वो जान-ए-चमन जाग उठी है, परदेस में फिर याद-ए-वतन जाग उठी है।”
यह हेरिटेज वॉक सिर्फ इतिहास से जुड़ने का अवसर नहीं था, बल्कि यह रिश्तों को मजबूत करने, नई यादें संजोने और इंसानियत के जज़्बे को ऊंचा करने का भी मौका था। LCWW इसी भावना के साथ आगे भी ऐसे अनूठे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि लखनऊ की तहज़ीब और विरासत को संजोकर रखा जा सके और नई पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।



