आज वैश्विकरण के कारण हिंदी भाषा का प्रसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से बढ़ा है : डॉ. नीतू शर्मा

इसाबेला थाबर्न कॉलेज
लखनऊ : हिंदी विभाग एवं उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के संयुक्त तत्वावाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी वैश्विक परिदृश्य में हिंदी का आयोजन 27 फरवरी 2025 को हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सर्वप्रथम छात्राओं द्वारा वंदना गीत की प्रस्तुति की गई उसके बाद आगत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। उसके बाद समन्वयक प्रो. डॉ. नीतू शर्मा अध्यक्ष हिंदी विभाग,ने संगोष्ठी परिचय देते हुए कहा कि किसी देश की संस्कृति और भाषा उसकी पहचान होती है और आज वैश्विकरण के कारण हिंदी भाषा का प्रसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से बढ़ा है मीडिया,साहित्य, विज्ञापन,हों या वेब सीरीज़, हिंदी फिल्म सबने विदेशों में हिंदी को समृद्ध किया है। इसकेे पश्चात् अतिथियों को प्रतीक चिह्न एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया,सर्वप्रथम प्राचार्या प्रो. पैंजी सिंह ने अपना वक्तव्य दिया उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व की भाषा है हमारी अपनी भाषा है, इसके विकास और उत्थान के लिए हमें सदा प्रयास रत रहना है, इस लिए शोध और उच्च शिक्षा के स्तर पर हिंदी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए
मुख्य वक्ता आदरणीय डॉ. सुनील पाठक अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड ने अपने वक्तव्य में कंबोडिया साहित्य के प्रचार प्रसार पर चर्चा की, इसके साथ ही ब्राह्मी लिपि पर पीपीटी द्वारा हिंदी के वैश्विकता पर प्रकाश डाला और फादर कामिल बुल्के की राम कथा साहित्य की चर्चा करते हुए उसे वैश्विकता से जोड़ा,
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा की हिंदी अध्ययन करते हुए हमें हिंदी को दुनिया की सबसे समृद्ध भाषा समझनी चाहिए ।
इसके बाद प्रोफेसर रामकृष्ण ने हिंदी के वैश्विक रूप पर अपने विचार रखते हुए हिंदी को विश्व व्यापी बताया और फ्रांस और जापान में हिंदी की महत्ता के बारे में बताया , अन्य देशों में हिंदी का महत्व बताते हुए कहते हैं हिंदी किसी न किसी माध्यम से सीखी जा रही है कहीं व्यवसाय के लिए कहीं तो कहीं और अध्ययन के लिए ।
तत्पश्चात प्रोफेसर श्रुति लखनऊ विश्वविद्यालय ने भी हिंदी के वैश्विकता पर ध्यान आकर्षित करते हुए यह बताया कि भारत के विश्व गुरु बनने की राह पर हिंदी भाषा का योगदान महत्वपूर्ण है, इसके साथ ही प्रवासी साहित्य के माध्यम से गिरमिटिया मजदूरों द्वारा हिंदी के प्रचार प्रसार पर भी बात की । डॉ. प्रणव मिश्रा बी एस एन वी कॉलेज लखनऊ ने अपने वक्तव्य में कहा कि जनता के हृदय में स्थान बनने से ही जन भाषा के रूप में स्वीकृति मिलती है”इसके साथ ही आपने बताया कि 10 जनवरी को हिंदी दिवस 180 देश में मनाया गया इस पर ध्यान आकर्षित करते हुए यह कहा कि यह हिंदी की स्वीकार्यता को दर्शाता है,
डॉ. राजेंद्र द्विवेदी राजकीय महाविद्यालय कुचलाईं सीतापुर ,ने भी हिंदी की स्थिति व्यावहारिक स्तर पर क्या है इस पर चर्चा किया तथा वैश्विक स्तर पर हिंदी की महत्ता बताते हुए कहा हिंदी विश्व के 190 देश में पढ़ाई जा रही है।
द्वितीय सत्र में छात्राओं द्वारा प्रपत्र वाचन किया गया जिसमें मुख्यतः किंजल द्विवेदी, मुस्कान सिंह, दीपशिखा राय, कुसुम लता, राजनंदिनी, स्नेहा सिंह, और गजाला हसन ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये, इन प्रतिभागियों में शोध पत्रों की गुणवत्ता के आधार पर प्रथम पुरस्कार मुस्कान सिंह, द्वितीय कुसुमलता ,और तृतीय गजाला हसन को दिया गया, सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया तत्पश्चात हिंदी विभाग अध्यक्ष ,आई टी कॉलेज प्रोफेसर नीतू शर्मा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया



