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डॉ. के.ए. पॉल ने संगारेड्डी में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म पर जताई कड़ी निंदा, जल्द न्यायिक कार्यवाही की मांग

डॉ. पॉल ने न्यायिक सुधारों और कठोर सजा की मांग की, पीड़िता व उसके परिवार को ‘चैरिटी सिटी’ में शरण देने की पेशकश

नई दिल्ली : डॉ. के.ए. पॉल ने इस सप्ताह संगारेड्डी में हुई छह वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म की जघन्य घटना की कड़ी निंदा की है और इसे अमानवीय व भयावह अपराध करार दिया है। उन्होंने स्थानीय पुलिस—एसपी, डीएसपी और सीआई जल्द कार्यवाही की सराहना की, जिन्होंने अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार किया। साथ ही, उन्होंने देशभर में सक्रिय और जवाबदेह कानून प्रवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए इन अधिकारियों को पदोन्नति देने की मांग की।

डॉ. पॉल ने घोषणा की कि वह 25 फरवरी को तेलंगाना हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अंतिम दलीलें पेश करेंगे। वे इस मामले में त्वरित न्याय दिलाने के साथ-साथ न्यायिक सुधारों की आवश्यकता को उजागर करेंगे, ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके, पीड़ितों को सुरक्षा मिल सके और बलात्कारियों को जल्द से जल्द सजा दी जाए। इसी के साथ उन्होंने भारतीय न्याय प्रणाली और कानून प्रवर्तन में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. पॉल ने सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि ये केवल नारे बनकर रह गई हैं और वास्तविक रूप से बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत की न्याय प्रणाली बेटियों को न्याय देने में असफल रही है और अब नारेबाजी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।

पीड़िता और उसके परिवार को होने वाले मानसिक आघात पर चिंता जताते हुए डॉ. पॉल ने उन्हें अपनी 1,200 एकड़ में फैली ‘चैरिटी सिटी’ में शरण देने की पेशकश भी की है। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों लोग न्याय प्रणाली की खामियों के कारण पीड़ित हैं। उन्होंने न्यायपालिका की देरी और निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए खुलासा किया कि वह पिछले छह महीनों से अपराध रोकथाम के लिए अपनी सात सूत्रीय योजना पेश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका दावा है कि यदि उनकी सिफारिशें लागू की जाएं, तो भारत में 99% बलात्कार रोके जा सकते हैं।

डॉ. पॉल ने बलात्कारियों को तीन महीने के भीतर मौत की सजा दिए जाने की मांग की और कहा कि सख्त दंड वाले देशों में यौन अपराधों की दर काफी कम है।

उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के फैसलों, विशेष रूप से धारा 494 पर, पर भी सवाल उठाए और कहा कि इन निर्णयों ने भारत की नैतिक और कानूनी संरचना को कमजोर किया है। उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट से जल्द से जल्द कठोर कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए कहा कि “न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।”

डॉ. पॉल का यह आह्वान भारतीय न्याय और विधायी प्रणाली में तत्काल सुधार की जरूरत को दर्शाता है, ताकि देश की महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाया जा सके। वे यौन हिंसा के खिलाफ सबसे कड़े कानूनों और दुष्कर्मियों के लिए कठोरतम सजा की मांग को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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