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NDMC क्षेत्र में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं : कुलजीत सिंह चहल

NDMC ने DERC के आदेश के खिलाफ अपील की, उपभोक्ताओं को मुफ्त सोलर ऊर्जा प्रदान करने की योजना पर काम

नई दिल्ली : नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के आदेश के खिलाफ अपील करने का निर्णय लिया है, जिसमें जनवरी से मार्च 2025 की तिमाही के लिए बिजली बिलों में पावर पर्चेज कॉस्ट एग्रीमेंट (PPCA) को बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस बढ़ोतरी के कारण NDMC क्षेत्र के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में वृद्धि होनी थी।

आज काउंसिल रूम पालिका केंद्र में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में, NDMC के अध्यक्ष केशव चंद्रा और उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने यह पुष्टि की कि परिषद ने DERC के आदेश के खिलाफ अपील की है । इस प्रेस कांफ्रेंस में अन्य परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकी, सरिता तोमर और दिनेश प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।

श्री चहल ने उपभोक्ताओ को आश्वासन दिया कि NDMC उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में कोई वृद्धि नहीं होने देगी, भले ही DERC का आदेश हो। वर्तमान में NDMC क्षेत्र में लगभग 55,000 बिजली कनेक्शन हैं, जिनमें से 60% से अधिक घरेलू उपभोक्ता हैं।

श्री चंद्रा ने बताया कि टैरिफ आदेश के अभाव में खातों का सत्यापन नहीं हो पाया है। इस संदर्भ में, DERC का PPAC आदेश, जो बिजली की लागत में वृद्धि का प्रस्ताव करता है, उपभोक्ताओं के बीच अनावश्यक घबराहट का कारण बन गया है। NDMC इस वर्तमान PPAC को स्वीकार नहीं करता है और DERC से प्रस्तावित दरों में कमी की मांग करेगा।
“NDMC क्षेत्र में निकट भविष्य में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं होगी। परिषद अपने उपभोक्ताओं की देखभाल करने के लिए प्रतिबद्ध है,” श्री चहल ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि PPAC एक अधिभार है जो विद्युत नियामक आयोग द्वारा वितरण कंपनियों द्वारा खरीदी गई बिजली की लागत में उतार-चढ़ाव को पूरा करने के लिए लगाया जाता है। यह लागत कोयले और ईंधन की कीमतों पर निर्भर करती है।

श्री कुलजीत सिंह चहल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि DERC ने PPCA को 38.75% से बढ़ाकर 54.52% करने की अनुमति दी है, जिसके कारण जनवरी से मार्च 2025 की तिमाही में बिजली बिलों में वृद्धि होनी थी । उन्होंने उपभोक्ताओं को आश्वासन दिया कि माननीय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नेतृत्व में NDMC उनके कल्याण के लिए काम कर रहा है और किसी भी उपभोक्ता पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा । उन्होंने कहा कि किसी भी उपभोक्ता को एक भी पैसा अतिरिक्त देना होगा ।

उन्होंने यह भी बताया कि 2017 में, भारत सरकार ने NDMC को ग्रीन पावर की दिशा में कदम बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद, NDMC ने दिल्ली सरकार से दो महंगे प्लांट—बवाना और प्रगति—को डि-लोकेट करने का अनुरोध किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। बवाना से बिजली की लागत ₹18 प्रति यूनिट है, जो दिल्ली में सबसे महंगी है, जबकि NDMC उपभोक्ताओं को ₹3 से ₹8 प्रति यूनिट के बीच बिजली प्रदान करता है। श्री चहल ने आगे बताया कि अगर NDMC को इसके लिए हर साल लगभग ₹150 करोड़ का अतिरिक्त बोझ दिल्ली सरकार के वजह से उठाना पड़ता है । परिषद् पर इस बोझ के बावजूद, श्री चहल ने आश्वासन दिया कि वह इन अतिरिक्त लागतों को अपने उपभोक्ताओं पर नहीं डालेंगे ।

उन्होंने यह भी बताया कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में PM सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1 kW रूटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करने पर ₹30,000 तक की सब्सिडी दी जाती है। NDMC इस सब्सिडी को बढ़ाने पर विचार कर रहा है और उपभोक्ताओं को मुफ्त सोलर ऊर्जा प्रदान करने की योजना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा की हम सौर उर्जा के क्षेत्र में NDMC को अतमनिर्भर बनाने के दिशा में जो काम चल रहा है उससे हम NDMC में “ZERO metering” करने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं ।

श्री चहल ने दिल्ली सरकार और उससे जुड़े लोगों को आलोचना करते हुए कहा कि वे दिल्ली के नागरिकों को परेशान करने के प्रयास में लगे हुए हैं। उन्होंने यह पुष्टि की कि NDMC ने पहले ही DERC के पास एक याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि वे DERC के आदेश का पालन नहीं करेंगे और उपभोक्ताओं पर कोई भी अधिभार नहीं लगाएंगे।

श्री चहल ने कहा की अरविन्द केजरीवाल के जनता विरोधी मंसूबो को हम कामयाब नहीं होने देंगे और जनता पर किसी भी तरह का कोई भी अतिरिक्त शुल्क का बोझ नही डालेंगे।

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