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मारुत ड्रोन का अनोखा कदम: नए खरीदारों के लिए डीजीसीए पायलट प्रशिक्षण मुफ्त

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कृषि राज्यों में अब निःशुल्क डीजीसीए पायलट प्रशिक्षण

लखनऊ :  मारुत ड्रोन, विनिर्माण और प्रशिक्षण के लिए डीजीसीए प्रमाणन वाली एक अग्रणी ड्रोन प्रौद्योगिकी कंपनी, ग्राहकों को निःशुल्क डीजीसीए प्रमाणित पायलट प्रशिक्षण प्रदान कर रही है, जो कि कृषि के क्षेत्र में ड्रोन प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह डीजीसीए पायलट प्रशिक्षण अब हर राज्य में निःशुल्क, खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और कृषि केंद्रित राज्यों के लिए है। इस निःशुल्क ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से, ग्राहक 10 वर्षों के लिए वैध डीजीसीए प्रमाणित रिमोट पायलट प्रमाणपत्र (आरपीसी) प्राप्त कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, वे आवश्यक तकनीकी कौशल अंतर्ग्रहण करेंगे और ड्रोन विनियमों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे, और साथ ही उन्हें 47,000 रुपये मूल्य की बैटरी का सेट निःशुल्क मिलेगा, जो पहली बार के खरीददारों के लिए महत्वपूर्ण लागत बचत प्रदान करता है, जिससे ड्रोन प्रौद्योगिकी में उनका प्रवेश अधिक सुलभ हो जाता है। कृषि उद्देश्यों के लिए ड्रोन संचालन करने हेतु, व्यक्तियों के लिए पायलट प्रमाणपत्र (आरपीसी) प्राप्त करना अनिवार्य है। सिविल एवियेशन के निदेशालय (डीजीसीए) ने इस प्रमाणन को प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड और प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की है। चूंकि अक्टूबर में कृषि का चरम मौसम शुरू होता है, इसलिए मारुत पूरे अक्टूबर महीने में अपने ग्राहकों को मुफ़्त ड्रोन प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
यह व्यापक 5-दिवसीय पाठ्यक्रम उन सभी लोगों के लिए संरचित किया गया है जो ड्रोन को सेवा या स्प्रे अनुप्रयोगों के रूप में देने में रुचि रखते हैं। इस पाठ्यक्रम में डीजीसीए के नियमों और विनियमों, ड्रोन डेटा विश्लेषण, नीतभार उपयोग पर सैद्धांतिक अंतर्दृष्टि के साथ-साथ, यूएएस्स और सिम्युलेटर प्रशिक्षण का व्यावहारिक अनुभव शामिल है। मारुत ड्रोन पूरे भारत में भागीदार प्रशिक्षण- संस्थाओं और आरपीटीओ के अपने व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाते हुए, देश भर के ग्राहकों को पायलट प्रशिक्षण प्रदान करेगा। यह पहल सुनिश्चित करती है कि सभी क्षेत्रों के व्यक्ति इस निःशुल्क प्रशिक्षण का लाभ उठा सकें, जिसकी लागत आमतौर पर 42,000 रुपये है।
“बाजार में मौजूद ज़्यादातर ड्रोन सिर्फ़ एक ही उद्देश्य के लिए संरचित किए गए हैं, जैसे कि कीटनाशक का छिड़काव। किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझते हुए, हमने पहला बहु-उपयोगी ड्रोन, एजी365 विकसित किया है। ट्रैक्टर की तरह ही, इस ड्रोन को, सिर्फ़ इसके संलग्नक भागों को बदलकर कई कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे कि निवेश पर बेहतर प्रतिफल मिल सकता है। हम ड्रोन का इस्तेमाल कई सालों तक अलग-अलग कृषि अनुप्रयोगों के लिए कर सकते हैं। कृषि में ड्रोन को अपनाने के प्रक्रिया को प्रेरित करने के उद्देश्य से एक मज़बूत इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मारुत के विज़न के अनुरूप, हम अक्टूबर महीने के लिए बिना किसी शुल्क के एक व्यापक कौशल विकास प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की पेशकश कर रहे हैं। मारुत का उद्देश्य ड्रोन तकनीक को अपनाने और वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करने के इच्छुक व्यक्तियों को शुरुआती स्तर का समर्थन प्रदान करना है। मारुत ड्रोन का इस्तेमाल करने वाला एक ड्रोन उद्यमी 40,000 से 90,000 रुपये प्रति माह तक कमा सकता है, जिससे वह अपने घर पर आराम से काम करके किसानों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।” ऐसा मारुत ड्रोन के सीईओ और सह-संस्थापक प्रेम कुमार विस्लावत ने कहा।
मारुत के मेड इन इंडिया किसान ड्रोन – एजी365 को भारतीय परिस्थितियों के लिए संरचित और विकसित किया गया है और इसका उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिससे उपयोगकर्ता को लागत पर उच्च लाभ मिलता है। 22 मिनट की क्षमता वाले इस ड्रोन एजी365 का 1.5 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया है। इसमें विकसित बाधा और भूभाग सेंसर लगे हैं, जो उबड़-खाबड़ और विषम इलाकों में भी सुरक्षित और सुचारू संचालन को सक्षम बनाते हैं। एजी365 कई नीतभार से लैस है और एक एजी365 का उपयोग कीटनाशकों के छिड़काव, कणिकाओं को प्रसारित करने और आरपीटीओ ड्रोन प्रशिक्षण- संस्थाओं को चलाने के लिए किया जा सकता है। एजी365 (मध्यम श्रेणी के ड्रोन) और एजी365एस (लघु श्रेणी के ड्रोन), दोनों को डीजीसीए द्वारा प्रमाणित किया गया है। मारुत ड्रोन ऋण सुविधा और बिक्री के बाद की सहायता भी प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, एजी365 व्यापक बीमा द्वारा सुरक्षित किया गया है जो ग्राहकों को किसी भी अप्रत्याशित घटना से बचाता है। भारत सरकार से सब्सिडी का लाभ उठाया जा सकता है। मारुत के कृषि ड्रोन विशेष रूप से कृषि प्रयोजनों के लिए विकसित किए गए हैं, ताकि फ़सल की हानि को कम किया जा सके, कृषि रसायनों का कम उपयोग हो, बेहतर उपज हो और किसानों को लाभ मिल सके।

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