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तृतीय लिंग को सम्मान की जरूरत : प्रेम भारद्वाज

तृतीय लिंग कल ,आज,कल विषय पर संगोष्ठी आयोजित

रायपुर:रायपुर छत्तीसगढ़ के मैटस विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्षा डॉ.रेशमा अंसारी के नेतृत्व में दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई.
तृतीय लिंग कल ,आज,कल विषय पर होने वाली इस परिचर्चा में प्रथम, सत्र के मुख्य अतिथि एवम् प्रथम वक्ता प्रख्यात साहित्यकार प्रेम भारद्वाज ज्ञान भिक्षु जी थे.
जिन्होंने तृतीय लिंग कल आज कल पर विस्तार से प्रकाश डाला.


मुख्य अतिथि प्रेम भारद्वाज़ जी ने कहा कि हम इन्हें अपने स्वार्थ के लिए बुलाते हैं, इनका कौन है, तिरस्कार भरी जिंदगी जीने के बाद भी यह हमारी खुशियों में शामिल होते हैं. हम इन्हें दूसरी दृस्टि से क्यों नहीं देख पाते. आज गर्व का विषय है कि इन पर बात की जा रही है. उन्होंने कहा कि  इनका ऐतिहासिक व्यक्तित्व शिखण्डी का है.
श्री ज्ञान भिक्षु  ने कहा कि तृतीय लिंग को
पैसे की जरूरत नहीं है, इन्हें सम्मान की जरूरत है. किन्नर किसी जाति के नहीं होते,इनको वरदान मिला है. इन्होंने कभी समाज से विद्रोह नहीं किया. श्री भारद्वाज ने कहा कि त्रेता ल, द्वापर में दो घटनाएं हुई थीं, जो इनके व्यक्तित्व का प्रमाण हैं.


श्री प्रेम भारद्वाज ने कहा कि 1817 में अंग्रेजों का शासन था अंग्रेजों ने इन्हें क्रिमिनल कैटेगरी में रखा. 1951 में जब भारत का संविधान बना तो इन्हें क्रिमिनल कैटेगरी से तो हटा दिया गया मगर नागरिकता नहीं दी गई. टी
एन सेशन ने इन्हें संवैधानिक नागरिकता दी और इन्हें वोट डालने का अधिकार दिलाया.

संगोष्ठी में किन्नर समाज उभयलिंगी समाज पर देश-विदेश से आए कई विद्वानों ने विचार रखे जिसमे प्रमुख प्रो. केसरी लाल वर्मा, कुलपति पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, प्रो. के. पी.यादव,कुलपति मैटस विश्वविद्यालय, डॉ. कुजुर समाजशास्त्र विभाग रविशंकर विश्वविद्यालय, मै प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञान भिक्षु ‘अन्तर्राष्ट्रीय कवि,साहित्यकार, प्रो शहाबुद्दीन शेख अध्यक्ष,विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज  ,पुणे,महाराष्ट्र , डॉ. लता अग्रवाल, वरिष्ठ लेखिका जया जादवानी,,लेखिका डॉ.सुधीर शर्मा इत्यादि शामिल हैं.


कार्यक्रम का संयोजन  हिंदी विभाग की अध्यक्ष डा. रेशमा अंसारी के द्वारा किया गया.
तृतीय लिंग विमर्श, कल ,आज और कल पर अन्तर्राष्ट्रीय
संगोष्ठी के उपविषयों में हिंदी कथा साहित्य और किन्नर विमर्श,तृतीय लिंग विमर्श का इतिहास, आधुनिक हिंदी पद्य साहित्य में किन्नर विमर्श, तृतीय लिंग विमर्श वैश्विक परिदृश्य, बॉलीवुड और तृतीय लिंग, किन्नर समाज के उत्थान में साहित्य का योगदान, तृतीय लिंग समुदाय की अस्मिता एवं समाज, तृतीय लिंग समुदाय के सशक्तिकरण में सरकार की भूमिका, तृतीय लिंग के प्रति समाज का दृष्टिकोण, तृतीय लिंग समुदाय का सामाजिक योगदान, तृतीय लिंग समुदाय के संघर्ष और अकेलेपन का संकट थे. उक्त विषयों के अतिरिक्त संदर्भित विषयों पर अन्य शोध पत्र भी आमंत्रित किए गए हैं.

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