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उत्तर रेलवे,लखनऊ मंडल द्वारा नाटक “शिलानारी” का मंचन
कलाकारों के सशक्त अभिनय एवम संगीत से नाट्य प्रस्तुति हुई जीवंत

लखनऊ. आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के बाद, देश अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। आज पुरुष के साथ कदम और कंधा मिलाकर चलने वाली नारी, किसी भी प्रकार से पुरुष से पीछे नहीं है। परंतु पुरुष प्रधान समाज में नारी को बराबरी के स्तर पर सम्मान मिलना आज भी एक बड़ी चुनौती है। मानसिकता के स्तर पर पुरुष प्रधान समाज में नारी की वेदना,व्यथा और त्रासदी को दर्शाता एवम प्रत्येक कालखंड मे नारी की समाज की मार्मिक स्थिति को चित्रित करते हुए नाटक शिलानारी का सफल मंचन 10 सितम्बर को उत्तर रेलवे,लखनऊ मंडल द्वारा आरडीएसओ स्थित न्यू आडोटोरियम में किया गया।

मंडल रेल प्रबंधक,उत्तर रेलवे,लखनऊ सुरेश कुमार सपरा के संचालन में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे,नई दिल्ली, आशुतोष गंगल बतौर मुख्य अतिथि एवम अध्यक्षा,उत्तर रेलवे महिला कल्याण संगठन,उत्तर रेलवे, नई दिल्ली, शिखा गंगल, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।
प्रस्तुत नाटक में अहिल्या के नारी से शिला बनने एवम त्रेतायुग में भगवान श्रीराम द्वारा उद्धार की कथा को संवादों,अभिनय तथा संगीत से सुसज्जित करते हुए दृश्यांकित किया गया था। इस प्रस्तुति में भाग लेने वालीएल जब कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय से इस नाट्य प्रस्तुति को सजीव कर दिया।स्वर्गीय नरेंद्र देव पांडेय द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन शैलेश श्रीवास्तव ने किया एवम इसकी प्रस्तुति,संयोजन एवम गायन देवेश चतुर्वेदी द्वारा किया गया।नाटक में अभिनय पक्ष में कलाकारों निशांत कुमार,शिखा श्रीवास्तव, अमरेंद्र यादव, अभय सिंह,भूपेंद्र पाण्डेय,श्री शिवांशु श्रीवास्तव सिद्धार्थ मिश्रा एवम चंद्रकांत द्विवेदी ने अपने पात्रों को बखूबी निभाया।




