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अरविंदो कॉलेज में डिजिटल मीडिया पर संगोष्ठी आयोजित

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री अरविंद महाविद्यालय में हिंदी विभाग की नवोन्मेष साहित्य सभा के तत्त्वावधान में डिजिटल युग में हिंदी का भविष्य : सभावनाएँ एवं चुनौतियाँ विषय पर एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस संगोष्ठी में विशिष्ट वक्ता के रुप में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो.सुधा सिंह और अन्य वक्ता के रुप में जाकिर हुसैन दिल्ली महाविद्यालय(सांध्य) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.प्रभात रंजन को आमंत्रित किया गया । कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप-प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुल गीत द्वारा किया गया। इसके बाद गणेश वंदना की गई। फिर आगत अतिथियों का स्वागत शॉल एवं स्मृति चिह्न देकर किया गया।

संगोष्ठी में विभाग प्रभारी डॉ.पंकजेन्द्र किशोर ने आगत अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। इसके पश्चात लेखक,अनुवादक तथा मीडिया विशेषज्ञ डॉ.प्रभात रंजन ने डिजिटलीकरण पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल मीडिया के कारण हिंदी ही नहीं बल्कि अन्य भाषाओं को भी महत्ता मिली है। इसके कारण विभिन्न भाषाओं की वैश्विक कनेक्टिविटी बढ़ी है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक हिंदी का प्रचार प्रसार अंग्रेजी अनुवाद के माध्यम से होते रहा है।विदेशी लेखकों के ऐसे अनेक लेखों की चर्चा की जिनमें ये कहा गया कि आनेवाले समय में हिंदी ही अंग्रेजी को बराबरी का टक्कर देगी।डॉ.प्रभात रंजन ने युनिकोड की भी चर्चा करते हुए इसे विभिन्न भाषाओं की कुंजी कहा तथा भविष्य में इसकी बढ़ती उपयोगिता के बारे में बताया।

विशिष्ट वक्ता के रुप में स्त्रीवादी लेखिका,मीडिया विशेषज्ञ तथा अनुवादक प्रो.सुधा सिंह ने डिजिटल युग के सकारात्मक बिंदुओं के साथ-साथ इसके नकारात्मक बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला।इस युग ने काम को जितना सरल बनाया है उतना ही संवेदना शून्य भी।उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिंदी को और अधिक सुधार की आवश्यकता है।अन्य भाषाओं की तरह हिंदी भी अपने लिए संघर्ष कर रही है।कलात्मक साहित्य की सुरक्षा का दायित्व प्रशासन का होता है। विभिन्न संस्थाएं भी इसके लिए कार्य करती हैं।डिजिटलीकरण के युग में कार्य भले ही शीघ्रता से हो जाते हों किंतु वह मानवीय संवेदनाओं का परिचायक नहीं हो सकता है।डिजिटल युग के पहले के साहित्य और बाद के साहित्य की तुलना करने पर यह अंतर साफ दिखाई देता है।इसे स्पष्ट करने के लिए उन्होंने कुछ नवीनतम कहानियों का उदाहरण भी दिया।
आज के कार्यक्रम में नवागत छात्र-छात्राओं का भी परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया।इस अवसर पर विद्यार्थियों हेतु एक अंतरमहाविद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका विषय — आनलाइन शिक्षण,कक्षा में परंपरागत शिक्षण से अधिक प्रभावी है , था। इसमें प्रथम तीन विद्यार्थियों को पुरस्कार में नकद राशि तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया गया। संगोष्ठी की समाप्ति पर नवोन्मेष साहित्य सभा के संयोजक डॉ.अभिनव प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन किया।कार्यक्रम की समाप्ति पर राष्ट्र गान हुआ । इस संगोष्ठी में प्रोफेसर हंसराज सुमन,डॉ. शिवमंगल कुमार के अलावा बड़ी संख्या में शिक्षकों व छात्रों ने भाग लिया । इस संगोष्ठी में अध्यापकों,शोधार्थियों,नवोन्मेष साहित्य सभा के पदाधिकारियों श्वेता(अध्यक्ष),राज(उपाध्यक्ष), कसक(सचिव), मोनी(सह-सचिव), देव रस्तोगी एवं नीरज(कोषाध्यक्ष) एवं अन्य छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। संपूर्ण कार्यक्रम महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य प्रो.अरुण चौधरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

 

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